राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय की अब ट्रस्ट में वापसी होगी मुश्किल, एसआईटी रिपोर्ट के बाद अंतिम फैसला
चंपत राय ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पत्र जारी कर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद अपना पक्ष रखने की घोषणा की। इस कवायद
चंपत राय ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पत्र जारी कर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद अपना पक्ष रखने की घोषणा की। इस कवायद को ट्रस्ट में उनकी वापसी की कोशिश के रूप में ही देखा जा रहा है। सूत्रों ने बताया, चंपत की ट्रस्ट में वापसी न होने देने पर आमराय है। पर, संगठन में उनका पद कायम रखने पर सहमति है। विहिप की केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक में व्यापक मंथन के बाद तय हुआ था कि अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जाए।
सूत्रों के मुताबिक, चूंकि ट्रस्ट की सारी कमान चंपत राय के ही पास थी, ऐसे में उनका बचाव मुश्किल है।केंद्र सरकार विवाद पर स्थायी विराम के लिए ट्रस्ट के पुनर्गठन की पक्षधर है। विहिप की इच्छा थी, ट्रस्ट को चंपत राय की जगह बजरंग लाल बागड़ा संभालें। आमराय के अभाव में कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया। यूपी में चंद महीने बाद चुनाव हैं, ऐसे में केंद्र मंदिर मामले में कोई खतरा नहीं उठाना चाहती। खासतौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय चाहता है कि ट्रस्ट का पुनर्गठन हो, जिससे सकारात्मक संदेश दिया जा सके।चंपत राय की भावी भूमिका पर विहिप में भी मतभेद हैं।
विहिप व संघ ने शुरू में ही सलाह दी थी कि चंपत नैतिक आधार पर ट्रस्ट छोड़ दें। विहिप की उत्तराखंड बैठक में भी उन्हें यही सलाह दी गई। न मानने पर संघ व प्रधानमंत्री कार्यालय ने सख्ती बरती। इसके बाद अयोध्या में होने वाली केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक चंपत की अनुपस्थिति में दिल्ली में बुलाई गई। विहिप के एक धड़े का मानना है, स्थिति स्पष्ट होने तक संगठन को चंपत से पूर्ण दूरी बनानी चाहिए।उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी मामले में मुझ पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, पर मैंने मौन धारण कर लिया है।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद हर सवाल व आरोप का जवाब दूंगा। मेरा 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन खुली किताब की तरह है। अंततः सत्य की ही जीत होगी।
