उत्तराखंड में फोरलेन प्रोजेक्ट के विरोध में मनेगा 'ब्लैक हरेला':एलीफेंट कॉरिडोर में पेड़ काटने पर उठे सवाल; पर्यावरणविद बोले- कोर्ट में मामला, फिर कटाई क्यों?
ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। एलीफेंट कॉरिडोर से गुजर रही इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए 4,475 पेड़ों की कटाई
ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। एलीफेंट कॉरिडोर से गुजर रही इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए 4,475 पेड़ों की कटाई शुरू होने पर पर्यावरणविदों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एलीफेंट कॉरिडोर से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, फिर भी बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। विरोध में 8 जुलाई को NHAI कार्यालय के बाहर प्रदर्शन होगा, जबकि पेड़ों की कटाई के विरोध में इस बार हरेला पर्व (16 जुलाई) को 'ब्लैक हरेला' के रूप में मनाया जाएगा। 20 किमी लंबी फोरलेन परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-7 (NH-7) पर भानियावाला से ऋषिकेश तक करीब 20 किमी लंबी फोरलेन सड़क बनाई जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित कर रहा है। परियोजना की लागत 600 से 892 करोड़ रुपए के बीच बताई जा रही है।
दावा है कि इसके पूरा होने पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट से ऋषिकेश का सफर करीब 30 मिनट में पूरा होगा। सड़क चौड़ीकरण के लिए 4,475 पेड़ों की कटाई की जा रही है, जबकि करीब 750 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की योजना है। इसलिए हो रहा विरोध पर्यावरणविदों और नागरिक संगठनों का कहना है कि यह परियोजना राज्य के संवेदनशील एलीफेंट कॉरिडोर से होकर गुजरती है। उनका आरोप है कि हजारों पेड़ों की कटाई से जंगलों का विखंडन होगा, हाथियों के प्राकृतिक आवागमन पर असर पड़ेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। उनका यह भी कहना है कि एलीफेंट कॉरिडोर से जुड़ा मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसके बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है। अब जानिए पर्यावरणविदों-सामाजिक संगठनों ने क्या कहा… 1. लंबित मामले के बीच पेड़ों की कटाई पर आपत्ति पर्यावरण मामलों से जुड़े हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि एलीफेंट कॉरिडोर और वन भूमि से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
उत्तराखंड हाईकोर्ट भी अपने आदेश में इसका उल्लेख कर चुका है। ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई किस आधार पर की जा रही है, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। 2. एलीफेंट कॉरिडोर प्रभावित होगा, संघर्ष बढ़ेगा ऋषिकेश निवासी पर्यावरणविद दिनेश सेमवाल ने कहा कि यह क्षेत्र राजाजी लैंडस्केप और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है। जंगलों का विखंडन होने पर हाथियों के प्राकृतिक रास्ते प्रभावित होंगे और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। उनका यह भी कहना है कि इस मार्ग पर ऐसा ट्रैफिक दबाव नहीं है, जिससे फोरलेन निर्माण की तत्काल जरूरत साबित होती हो। 3. मानसून में पेड़ों की कटाई पर सवाल सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड में पहली बार मानसून के दौरान हजारों पेड़ों की कटाई हो रही है।
उनके मुताबिक बरसात पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का समय होता है, ऐसे में इसी दौरान पेड़ काटना चिंताजनक है। उन्होंने परियोजना का दोबारा पर्यावरणीय मूल्यांकन कराने और क्षतिपूरक वनरोपण की समीक्षा की भी मांग की। 8 जुलाई को प्रदर्शन का ऐलान नागरिक समूहों ने आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। 8 जुलाई को NHAI कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा इस वर्ष हरेला पर्व को 'ब्लैक हरेला' के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य पेड़ों की कटाई और जंगलों को हो रहे नुकसान के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना है।