इंडोनेशिया ब्रह्मोस का मुरीद: इस मिसाइल की मारक क्षमता कितनी, समझौते से भारत के रक्षा क्षेत्र को क्या लाभ?
भारत ने इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण करार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान
भारत ने इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण करार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान हुए इस समझौते को भारत के रक्षा निर्यात और घरेलू रक्षा उद्योग के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा इंडोनेशिया ने भारत में विकसित 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया है। इससे भारत की रक्षा तकनीक पर दुनिया का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है। ब्रह्मोस मिसाइल कितनी मारक और खास है? ब्रह्मोस मिसाइल अपनी तेज रफ्तार, सटीक निशाने और आधुनिक तकनीक के कारण दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना यानी मैक 2.8 से 3 की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। इसके नए संस्करणों की मारक क्षमता 450 से 800 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह 200 से 300 किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन के रडार से बच सकती है और लक्ष्य पर बेहद सटीक हमला करती है। इसकी उड़ान का रास्ता आसानी से अनुमानित नहीं किया जा सकता, इसलिए आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भी इसे रोकना बेहद मुश्किल माना जाता है। ब्रह्मोस दो चरणों (टू-स्टेज) वाली मिसाइल है। पहले चरण में सॉलिड प्रोपेलेंट बूस्टर इंजन इसे सुपरसोनिक गति तक पहुंचाता है, जबकि दूसरे चरण में लिक्विड रैमजेट इंजन इसे पूरी उड़ान के दौरान तेज गति देता है। यह 'फायर एंड फॉरगेट' सिद्धांत पर काम करती है, यानी लॉन्च के बाद इसे दोबारा नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह अपने गाइडेंस सिस्टम तथा एडवांस एम्बेडेड सॉफ्टवेयर की मदद से स्वयं लक्ष्य तक पहुंचती है। डेवलपर्स के अनुसार, ब्रह्मोस की सटीकता करीब 99.99 प्रतिशत मानी जाती है, जो इसे आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी हथियार बनाती है। भारत के डिफेंस सेक्टर को इस समझौते से क्या फायदा होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ बैठक के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को नई मजबूती दे रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, रक्षा उद्योग, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई है। इसके अलावा स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज, चुनावी तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी कई समझौते हुए हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मोस समझौता इन सभी में सबसे अहम माना जा रहा है। ब्रह्मोस की आपूर्ति बढ़ने से भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। मिसाइल, लॉन्चर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरणों के उत्पादन में तेजी आएगी। इससे रक्षा क्षेत्र से जुड़ी सार्वजनिक और निजी कंपनियों को नए ऑर्डर मिल सकते हैं। रक्षा निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा की आमद होगी और भारत की 'मेक इन इंडिया' तथा रक्षा आत्मनिर्भरता की नीति को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। भारत का लक्ष्य आने वाले वर्षों में रक्षा निर्यात को लगातार बढ़ाने का है और ऐसे समझौते इस दिशा में अहम माने जा रहे हैं। इंडोनेशिया के लिए यह डील क्यों अहम है? समुद्री सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा तैयारियां मजबूत होंगी। लंबी दूरी तक तेजी से जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता मिलेगी। क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। क्या केवल ब्रह्मोस ही नहीं, 'अस्त्र' मिसाइल भी बढ़ाएगी भारत की पहचान? इंडोनेशिया ने भारत की 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित यह 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' मिसाइल है, जो दूर से ही दुश्मन के लड़ाकू विमानों को निशाना बना सकती है। इसके अलावा दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला, स्टील क्षेत्र, चुनावी तकनीक और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत इंडोनेशिया को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में भी सहयोग करेगा।
