Explainer: सतलुज का सियासत और बवाल से है पुराना रिश्ता, क्या है 60 साल से अनसुलझे एक और विवाद की पूरी कहानी?
सेंसर बोर्ड को लेकर क्या बोले निर्देशक? मार्च 2025 में बीबीसी पंजाबी को दिए एक इंटरव्यू में निर्देशक हनी त्रेहन ने बताया था कि केंद्रीय
सेंसर बोर्ड को लेकर क्या बोले निर्देशक? मार्च 2025 में बीबीसी पंजाबी को दिए एक इंटरव्यू में निर्देशक हनी त्रेहन ने बताया था कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने शुरुआत में फिल्म में 21 कट लगाने को कहा था। बाद में यह संख्या बढ़कर 120 से अधिक हो गई। त्रेहन ने कहा था कि कई कट ऐसे थे, जिनका कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनसे फिल्म से जसवंत सिंह खालड़ा का नाम हटाने तक को कहा गया था।
उनके अनुसार, यह स्वीकार करना संभव नहीं था क्योंकि फिल्म पूरी तरह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। फिल्म के मुख्य कलाकार दिलजीत दोसांझ ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस 'शैडो बैन' की तुलना खालरा के गायब होने और उनकी हत्या से की। उन्होंने कहा कि फिल्म लोगों तक पहुंच चुकी है। उनका जो मकसद था वह पूरा हो गया है। अब बैन करने का कोई फायदा नहीं है। यहां पढ़ें फिल्म सतलुज का रिव्यू: Satluj Movie Review: रूह कांप जाए इतना सच दिखाती है फिल्म; दिलजीत ने जीता दिल, 'धुरंधर’ वाले सुविंदर ने डराया फिल्म की कहानी किस पर आधारित है?
फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। खालड़ा ने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और लापता हुए हजारों सिख युवाओं के मामलों को दस्तावेजों के आधार पर उजागर कर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। बाद में वे शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के महासचिव बने। 6 सितंबर 1995 को उन्हें कथित तौर पर अमृतसर स्थित उनके घर से अगवा कर लिया गया। आरोप है कि पुलिस हिरासत में यातनाएं देने के बाद उनकी हत्या कर शव को हरिके पुल के पास सतलुज नदी में फेंक दिया गया।
हालांकि सतलुज को लेकर यह विवाद नया नहीं है, सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद पंजाब और हरियाणा के बीच कई दशकों से चला आ रहा सबसे बड़े अंतरराज्यीय जल विवादों में से एक है। आइए इसकी पृष्ठभूमि के बारे में भी जानते हैं।
