Explainer: करोड़ों का बजट, फिर भी पानी-पानी मुंबई; क्या है हर साल की बाढ़ की असली वजह?
मीठी नदी से जुड़े इलाकों में क्यों बढ़ जाता है खतरा? संजय शिरोडकर कहते हैं कि कुर्ला और मीठी नदी के आसपास के इलाकों में
मीठी नदी से जुड़े इलाकों में क्यों बढ़ जाता है खतरा? संजय शिरोडकर कहते हैं कि कुर्ला और मीठी नदी के आसपास के इलाकों में सिर्फ तेज बारिश ही बाढ़ की वजह नहीं होती। मीठी नदी और उससे जुड़े नालों की हालत भी इसके लिए जिम्मेदार होती है। हर साल मानसून से पहले नदी और नालों से गाद (मिट्टी) निकालने का काम किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद हर बारिश में यहां जलभराव की समस्या बनी रहती है।
साथ ही, नदी पर अतिक्रमण और पानी निकालने की कम होती क्षमता भी बाढ़ का खतरा बढ़ा देती है। उन्होंने कहा कि नदी जिस दिन से नाला बन गई है, उस दिन से यह समस्या बढ़ती चली जा रही है। जलवायु परिवर्तन ने चुनौती और बढ़ा दी विशेषज्ञों का मानना है कि अब मुंबई की बाढ़ की समस्या को केवल ड्रेनेज सिस्टम या रखरखाव से नहीं समझा जा सकता। जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक बारिश की घटनाएं पहले के मुकाबले अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं।
शहर का अधिकांश बुनियादी ढांचा कई दशक पहले बनाया गया था। उस समय इतनी तीव्र और अधिक मात्रा में होने वाली बारिश को ध्यान में रखकर इसकी योजना नहीं बनाई गई थी। ऐसे में ड्रेनेज सिस्टम में सुधार होने के बाद भी बदलते मौसम के कारण उसकी क्षमता जल्दी कम पड़ जाती है। इसी वजह से जहां पुराने बाढ़ प्रभावित इलाके हर साल डूबते हैं, वहीं अब शहर के नए हिस्सों में भी जलभराव की घटनाएं बढ़ने लगी हैं।
जर्मनवॉच की क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 के अनुसार, 1995 से 2024 के बीच जलवायु संबंधी आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत 9वें स्थान पर रहा। इस दौरान अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं के कारण देश में करीब 80 हजार लोगों की मौत हुई, जो दुनिया भर में ऐसी आपदाओं से हुई कुल मौतों का लगभग 9.6% है।
