एक साल तक डाक नहीं बांटी... हंगामा होते ही डाकिया का खुला राज, सब हैरान
एक समय था, गांव हो या शहर, डाकिया गली चौराहे पर नजर आते थे. अभी भी कई अहम दस्तावेज पोस्ट ऑफिस के जरिये ही आम
एक समय था, गांव हो या शहर, डाकिया गली चौराहे पर नजर आते थे. अभी भी कई अहम दस्तावेज पोस्ट ऑफिस के जरिये ही आम आदमी तक पहुंचता है.
हालांकि मौजूदा दौर में डाकिया की भूमिका थोड़ी बदल गई है, चिट्ठियां नहीं आती हैं. लेकिन जरूर दस्तावेज आज भी पोस्ट ऑफिस से घर-घर तक
पहुंचता है. अब जरा सोचिए, अगर कोई डाकिया एक साल तक डाक नहीं बांटे तो क्या होगा?
