मंदिर 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं: क्या यह कहकर छिपाई जा सकती है मंदिरों की जानकारी? CIC ने साफ कर दी तस्वीर
केंद्रीय सूचना आयोग ने पुडुचेरी के हिंदू धार्मिक संस्थान एवं वक्फ विभाग को निर्देश दिया है कि वह श्री वेदपुरीश्वरर श्री वरदराजपेरुमल देवस्थानम से जुड़ी
केंद्रीय सूचना आयोग ने पुडुचेरी के हिंदू धार्मिक संस्थान एवं वक्फ विभाग को निर्देश दिया है कि वह श्री वेदपुरीश्वरर श्री वरदराजपेरुमल देवस्थानम से जुड़ी आरटीआई (RTI) अर्जी पर दोबारा विचार करे और उपलब्ध रिकॉर्ड उपलब्ध कराए। आयोग ने कहा कि मंदिर का दर्जा 'पब्लिक अथॉरिटी' न होने का हो सकता है, लेकिन इससे विभाग मंदिर से संबंधित अपने पास मौजूद जानकारी का खुलासा करने की कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता। सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने कहा कि अपीलकर्ता ने आरटीआई आवेदन मंदिर के बजाय विभाग को दिया था, जो सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत एक मान्यता प्राप्त 'पब्लिक अथॉरिटी' है।केंद्रीय सूचना आयोग ने यह आदेश एक अपील पर सुनवाई के बाद दिया। आरटीआई आवेदन में वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के वार्षिक बजट की प्रतियां, वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक के ऑडिट किए गए लेखा-व्यौरे, ऑडिट रिपोर्ट और ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण से जुड़े विवरण मांगे गए थे।
आवेदक ने वर्ष 2021 से मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों, उन पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई, लंबित शिकायतों, शिकायतों से संबंधित कार्यवाही की प्रतियां, निरीक्षण रिपोर्ट, पुडुचेरी हिंदू धार्मिक संस्थान अधिनियम के तहत रखे गए रजिस्टर तथा मंदिर की संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े आदेशों का विवरण भी मांगा था।विभाग ने बजट और ऑडिट रिकॉर्ड से संबंधित आरटीआई आवेदन को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत मंदिर प्रशासन को स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि देवस्थानम सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(h) के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है, क्योंकि उसे पुडुचेरी सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं होती। इसके समर्थन में मंदिर प्रशासन ने वर्ष 2020 में केंद्रीय सूचना आयोग के एक पुराने आदेश का हवाला भी दिया।सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने कहा कि अपीलकर्ता ने आवेदन विभाग को दिया था, जो सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत एक मान्यता प्राप्त 'पब्लिक अथॉरिटी' है।
आयोग ने स्पष्ट किया, "सिर्फ इसलिए कि मंदिर स्वयं 'पब्लिक अथॉरिटी' की श्रेणी में नहीं आता, विभाग अपनी उस कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता जिसके तहत उसे अपने पास उपलब्ध या कानून के अनुसार अपने नियंत्रण में मौजूद जानकारी उपलब्ध करानी होती है।"आयोग ने आगे कहा कि विभाग केवल इस आधार पर अपने पास उपलब्ध रिकॉर्ड तक पहुंच देने से इनकार नहीं कर सकता कि उसने आवेदन ऐसी संस्था को भेज दिया है, जो स्वयं को 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं मानती।आयोग ने पाया कि विभाग ने वार्षिक बजट, ऑडिट किए गए खातों और ऑडिट रिपोर्ट से जुड़े सवालों पर केवल मंदिर प्रशासन के जवाब पर भरोसा किया। विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पुडुचेरी हिंदू धार्मिक संस्थान अधिनियम के तहत अपने वैधानिक और निगरानी संबंधी दायित्व निभाते हुए उसके पास इन दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध थीं या नहीं।आयोग विभाग की इस दलील से भी सहमत नहीं हुआ कि शिकायतों, जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(f) के तहत 'सूचना' की परिभाषा में नहीं आती।
