Maharashtra Updates: मुंबई एयरपोर्ट पर छह करोड़ रुपये का सोना जब्त, महिला यात्री गिरफ्तार
यात्री और उसके सामान की तलाशी के दौरान डीआरआई अधिकारियों ने उसकी पैंट के अंदर छिपाकर रखी गई विदेशी मार्किंग वाली चार सोने की ईंटें
यात्री और उसके सामान की तलाशी के दौरान डीआरआई अधिकारियों ने उसकी पैंट के अंदर छिपाकर रखी गई विदेशी मार्किंग वाली चार सोने की ईंटें बरामद कीं। इनका कुल वजन चार किलोग्राम है। अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए सोने की घरेलू बाजार में अनुमानित कीमत करीब छह करोड़ रुपये है। महिला यात्री को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सोने के स्रोत और कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार आज भी प्रासंगिक, भाजपा को उसी राह पर आगे बढ़ना चाहिए: गडकरी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और भाजपा को उन्हीं विचारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है। सभी धर्मों के लोगों को राष्ट्रीय आदर्शों से जोड़कर भारत को 'विश्वगुरु' बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत केवल हिंदुओं का नहीं, बल्कि सभी भारतीयों का है।
नागपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए गडकरी ने कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तुष्टिकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने जनसंघ, जो बाद में भाजपा का पूर्ववर्ती संगठन बना, उसके बारे में गलत धारणाएं फैलाने का काम किया। गडकरी ने विभाजन का जिक्र करते हुए कहा, "दो देश भारत और पाकिस्तान बने। उनके बनने के बाद का इतिहास आप सभी जानते हैं और आज भी हम उसके परिणाम भुगत रहे हैं।" उन्होंने कहा, "आज भी हमारी (भाजपा की) विचारधारा की सबसे बड़ी पहचान यह है कि राष्ट्र सर्वोपरि है।
राष्ट्रवाद हमारी सामूहिक आस्था, श्रद्धा और प्रेरणा है। राष्ट्रभक्ति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन की भी सबसे बड़ी विशेषता थी। लेकिन कांग्रेस और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तुष्टिकरण की नीति अपनाई।" गडकरी ने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के लिए कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर तुष्टिकरण की नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि इससे धर्मों के बीच विभाजन बढ़ा और जातिवाद तथा सांप्रदायिकता को बढ़ावा मिला।
