Lucknow, India

टीना डाबी टॉप 100 कलेक्टरों में, घी-लड्डू का अभियान चलाया:जितेंद्र सोनी ने गरीब बच्चों को पहनाए जूते-चप्पल; देश के टॉप IAS में राजस्थान के 6

Published 27 May 2026 · india

टीना डाबी टॉप 100 कलेक्टरों में, घी-लड्डू का अभियान चलाया IAS टीना डाबी की बच्चों के लिए गुड़-मूंगफली-घी के लड्डू की पहल, महिलाओं के लिए लेडीज फर्स्ट अभियान ने उन्हें देश के टॉप-100 कलेक्टर में जगह दिलाई है।. कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी नो बैग डे और नंगे पैर आने वाले

टीना डाबी टॉप 100 कलेक्टरों में, घी-लड्डू का अभियान चलाया IAS टीना डाबी की बच्चों के लिए गुड़-मूंगफली-घी के लड्डू की पहल, महिलाओं के लिए लेडीज फर्स्ट अभियान ने उन्हें देश के टॉप-100 कलेक्टर में जगह दिलाई है।. कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी नो बैग डे और नंगे पैर आने वाले बच्चों के लिए जूते-चप्पल बांटने के अभियान के कारण वो भी इस लिस्ट में हैं। टॉप 100 की लिस्ट में टीना डाबी और जितेंद्र कुमार सोनी सहित 6 कलेक्टर और शामिल हैं। दरअसल, फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट ने 2025-26 के दौरान देश के 800 जिलों के कलेक्टरों का सर्वे किया था। सर्वे कलेक्टरों की ओर से नए तरह के कामों, सत्ता, विपक्ष के स्थानीय नेताओं-सीनियर IAS के फीडबैक, गुड गवर्नेंस सहित 10 बिन्दुओं के आधार पर किया गया। सर्वे के बाद 'सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026' लिस्ट जारी की गई। संस्थान 15 साल से ये सर्वे कर रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… चरण पादुका अभियान: जितेंद्र कुमार सोनी अलवर, जालोर, झालावाड़ सहित अन्य जिलों के सरकारी स्कूलों में नंगे पैर आने वाले लाखों गरीब बच्चों को दानदाताओं के सहयोग से जूते-चप्पल पहना चुके हैं। इसके लिए उन्हें 2019 में 'डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवॉर्ड' से सम्मानित भी किया गया। जितेंद्र कुमार सोनी अलवर, जालोर, झालावाड़ सहित अन्य जिलों के सरकारी स्कूलों में नंगे पैर आने वाले लाखों गरीब बच्चों को दानदाताओं के सहयोग से जूते-चप्पल पहना चुके हैं। इसके लिए उन्हें 2019 में 'डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवॉर्ड' से सम्मानित भी किया गया। जयपुर-नागौर रास्ता खोलो अभियान: यह नागौर और जयपुर कलेक्टर रहते किसानों और ग्रामीणों की सुविधा के लिए शुरू किया गया अभियान था। वर्षों से बंद पड़े खेतों, ढाणियों और गांवों के रास्तों को आपसी समझाइश से खुलवाया गया। यह नागौर और जयपुर कलेक्टर रहते किसानों और ग्रामीणों की सुविधा के लिए शुरू किया गया अभियान था। वर्षों से बंद पड़े खेतों, ढाणियों और गांवों के रास्तों को आपसी समझाइश से खुलवाया गया। मनरेगा आखर अभियान: इस पहल का मुख्य नेतृत्व तत्कालीन जयपुर कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने किया था। इसमें मनरेगा में काम करने वाले निरक्षर श्रमिकों को साक्षर (हस्ताक्षर और सामान्य अक्षर ज्ञान) बनाना और उन्हें डिजिटली सशक्त करने का प्रयास किया गया। इस पहल का मुख्य नेतृत्व तत्कालीन जयपुर कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने किया था। इसमें मनरेगा में काम करने वाले निरक्षर श्रमिकों को साक्षर (हस्ताक्षर और सामान्य अक्षर ज्ञान) बनाना और उन्हें डिजिटली सशक्त करने का प्रयास किया गया। जयपुर में आमजन की समस्याओं के जल्द समाधान और योजनाओं को प्रभावी तौर पर लागू करने के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम डेवलप किया। अलवर जिले में दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए उल्लेखनीय काम किया।

इसके लिए राष्ट्रपति की ओर से 'इंडियन एक्सीलेंस अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। जैसाण शक्ति (लेडीज फर्स्ट): जैसलमेर कलेक्टर रहते महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'जैसाण शक्ति' (लेडीज फर्स्ट) विशेष अभियान चलाया। जिन सरकारी स्कूलों में महिला टीचर नहीं हैं, वहां स्थानीय पढ़ी-लिखी महिलाओं को 'विद्या सखी' बनाया, ताकि बच्चियां स्कूल जाने में सहज महसूस करें और ड्रॉप-आउट दर को रोका जा सके। स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। जैसलमेर कलेक्टर रहते महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'जैसाण शक्ति' (लेडीज फर्स्ट) विशेष अभियान चलाया। जिन सरकारी स्कूलों में महिला टीचर नहीं हैं, वहां स्थानीय पढ़ी-लिखी महिलाओं को 'विद्या सखी' बनाया, ताकि बच्चियां स्कूल जाने में सहज महसूस करें और ड्रॉप-आउट दर को रोका जा सके। स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। मिशन सुरक्षा चक्र: बाड़मेर जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग की ओर से कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) की दर को कम करने के लिए मिशन सुरक्षा चक्र अभियान के तहत हजारों बच्चों और महिलाओं का घर-घर सर्वे कर कुपोषितों और एनीमिक मरीजों की पहचान की गई। ऐसे बच्चों में पोषण बढ़ाने और सामान्य श्रेणी में लाने के लिए विशेष पौष्टिक आहार दिया गया, जैसे मूंगफली, गुड़ और घी से बने लड्डू। बाड़मेर जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग की ओर से कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) की दर को कम करने के लिए मिशन सुरक्षा चक्र अभियान के तहत हजारों बच्चों और महिलाओं का घर-घर सर्वे कर कुपोषितों और एनीमिक मरीजों की पहचान की गई। ऐसे बच्चों में पोषण बढ़ाने और सामान्य श्रेणी में लाने के लिए विशेष पौष्टिक आहार दिया गया, जैसे मूंगफली, गुड़ और घी से बने लड्डू। बाड़मेर में जल संचय मॉडल (Rainwater Harvesting Model): वर्षा जल संरक्षण के तहत 87 हजार से अधिक टांके बनवाकर हजारों ग्रामीणों को पानी की समस्या से राहत दिलाई। पिछले साल इसके लिए टीना डाबी को राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय सम्मान भी मिला। 'जल सेतु' एप भी लॉन्च किया, जिससे पानी से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। वर्षा जल संरक्षण के तहत 87 हजार से अधिक टांके बनवाकर हजारों ग्रामीणों को पानी की समस्या से राहत दिलाई। पिछले साल इसके लिए टीना डाबी को राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय सम्मान भी मिला। 'जल सेतु' एप भी लॉन्च किया, जिससे पानी से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। मरु उड़ान: बाड़मेर में कलेक्टर रहते 'मरु उड़ान' (सशक्त नारी, सशक्त समाज) अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत 200 से अधिक युवतियों और महिलाओं को ड्राइविंग सिखाकर हाथों-हाथ लर्निंग लाइसेंस दिलवाने की पहल की थी, ताकि महिलाएं आपातकाल में अपने परिवार की सारथी बन सकें।

बाड़मेर में कलेक्टर रहते 'मरु उड़ान' (सशक्त नारी, सशक्त समाज) अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत 200 से अधिक युवतियों और महिलाओं को ड्राइविंग सिखाकर हाथों-हाथ लर्निंग लाइसेंस दिलवाने की पहल की थी, ताकि महिलाएं आपातकाल में अपने परिवार की सारथी बन सकें। खाटू मॉडल: सीकर कलेक्टर रहते हुए खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने की व्यवस्था को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया। भारी भीड़ के प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए। ट्रैफिक से लेकर श्रद्धालुओं की लाइन तक सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया गया। सीकर कलेक्टर रहते हुए खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने की व्यवस्था को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया। भारी भीड़ के प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए। ट्रैफिक से लेकर श्रद्धालुओं की लाइन तक सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया गया। बिना विवाद सीकर शहर की सड़कें चौड़ी की और शहर को भी सुंदर बनाने में उल्लेखनीय काम किया। सीकर में बालिका सुरक्षा और शिक्षा में बेहतर काम किया। सीएम भजनलाल शर्मा ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत पहले नंबर पर रहने पर पिछले साल सम्मानित किया। हरित चित्तौड़: चित्तौड़गढ़ कलेक्टर रहते 'हरित चित्तौड़' अभियान शुरू किया। बड़ी संख्या में पौधे लगाने के साथ पौधों की सुरक्षा के लिए 'हरित चित्तौड़' नाम का एप भी लॉन्च किया। एप से पौधों के रखरखाव की ऑन लाइन ट्रैकिंग सुविधा मिली। स्कूलों में एक शिक्षक को 'वृक्ष प्रेमी' और छात्र को 'वृक्ष मित्र' बनाया गया। इनकी जिनकी जिम्मेदारी पौधों की देखभाल करना था। नर्सरियों से आम जनता और जनप्रतिनिधियों को रियायती दरों पर पौधे उपलब्ध कराए गए। चित्तौड़गढ़ कलेक्टर रहते 'हरित चित्तौड़' अभियान शुरू किया। बड़ी संख्या में पौधे लगाने के साथ पौधों की सुरक्षा के लिए 'हरित चित्तौड़' नाम का एप भी लॉन्च किया। एप से पौधों के रखरखाव की ऑन लाइन ट्रैकिंग सुविधा मिली। स्कूलों में एक शिक्षक को 'वृक्ष प्रेमी' और छात्र को 'वृक्ष मित्र' बनाया गया। इनकी जिनकी जिम्मेदारी पौधों की देखभाल करना था। नर्सरियों से आम जनता और जनप्रतिनिधियों को रियायती दरों पर पौधे उपलब्ध कराए गए। पंच गौरव: जोधपुर कलेक्टर रहते 'पंच गौरव' कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिले में प्रमुख एक उत्पाद, एक फसल, एक वनस्पति, एक खेल, एक पर्यटक स्थल को चुन कर उसे बढ़ावा दिया। जोधपुर कलेक्टर रहते 'पंच गौरव' कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिले में प्रमुख एक उत्पाद, एक फसल, एक वनस्पति, एक खेल, एक पर्यटक स्थल को चुन कर उसे बढ़ावा दिया। मतदान से मार्गदर्शन तक कार्यक्रम: युवाओं को करियर के सही विकल्प चुनने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए।

युवाओं को करियर के सही विकल्प चुनने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए। भिखारी मुक्त भरतपुर: भरतपुर कलेक्टर रहते भिखारी-मुक्त शहर बनाने पर काम किया। सर्वे कर 991 लोग चिह्नित किए गए, जो भीख मांग कर अपना गुजारा कर रहे थे। इन लोगों को मुख्य धारा से जोड़ा। रोजगार दिए गए। खाने-पीने और रहने के लिए इंदिरा रसोई और रैन बसेरों में व्यवस्था की गई। ड्रॉप आउट को स्कूल से जोड़ा: डूंगरपुर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए मुहिम चलाई। विभिन्न कारणों से शिक्षा छोड़ चुके कई बच्चे वापस स्कूल पहुंचे। डूंगरपुर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए मुहिम चलाई। विभिन्न कारणों से शिक्षा छोड़ चुके कई बच्चे वापस स्कूल पहुंचे। दिव्यांगजन सशक्तिकरण: डूंगरपुर जिले में दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का भरपूर फायदा दिलाया। इसके चलते उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। डूंगरपुर जिले में दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का भरपूर फायदा दिलाया। इसके चलते उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। जल संरक्षण और प्रबंधन: डूंगरपुर जिले में सामुदायिक जल संरक्षण और प्रबंधन को लेकर उल्लेखनीय काम किए। इसके लिए भी उन्हें सम्मान दिया गया। डूंगरपुर जिले में सामुदायिक जल संरक्षण और प्रबंधन को लेकर उल्लेखनीय काम किए। इसके लिए भी उन्हें सम्मान दिया गया। औद्योगिक विकास: करौली जिले के कलेक्टर रहते अंकित ने लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास के लिए अच्छा काम किया। इसके लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। महिला रोजगार: झुंझुनूं में मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन के जरिए आधी आबादी को स्वरोजगार से जोड़ने की मुहिम शुरू की। झुंझुनूं में मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन के जरिए आधी आबादी को स्वरोजगार से जोड़ने की मुहिम शुरू की। जल संरक्षण: वर्षा जल संरक्षण को लेकर अभियान चलाया और बेहतर रिजल्ट दिए। संस्था 15 साल से करा रही सर्वे, 10 मानक के आधार पर रैंकिंग फेम इंडिया मैगजीन की ओर से सर्वे की शुरूआत 2011 में हुई थी। एशिया पोस्ट के सहयोग से फेम इंडिया मैगजीन की ओर से जिलाधिकारियों/जिला मजिस्ट्रेटों (IAS) की लोकप्रियता और उनके कामों को लेकर लगभग हर साल सर्वे किया जाता है। सर्वे में कुछ मानक तय किए जाते हैं, जिनके आधार पर IAS का चयन किया जाता है। इसमें IAS नंबर वन या टू या थ्री जैसी बात नहीं है, सभी 100 को टॉप रैंकिंग मिली है।

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