Maharashtra: दुबई भेजे जा रहे थे मुंबई के बैंक खाते और सिम कार्ड, क्राइम ब्रांच ने किया बड़े गिरोह का पर्दाफाश
डीसीपी राज तिलक रौशन ने शनिवार को बताया कि मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 2 को अपने खुफिया सूत्रों से पक्की जानकारी मिली थी कि
डीसीपी राज तिलक रौशन ने शनिवार को बताया कि मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 2 को अपने खुफिया सूत्रों से पक्की जानकारी मिली थी कि मुंबई के मस्जिद बंदर पश्चिम इलाके के ईसाजी स्ट्रीट पर स्थित पार्श्व चैंबर्स की तीसरी मंजिल पर 'जी. डी. ओवरसीज' नाम से एक फर्जी कंपनी का ऑफिस चलाया जा रहा है। इस ऑफिस में मुंबई के अलग-अलग बैंकों में खोले गए नए चालू खातों के दस्तावेज और सिम कार्ड इकट्ठा किए जाते थे।
यहां से इन सभी सिम कार्ड और बैंक खातों को एक्टिवेट करने के बाद दुबई भेजा जाता था, ताकि वहां बैठे ठग गेमिंग और साइबर फ्रॉड को अंजाम दे सकें।जानकारी मिलते ही क्राइम ब्रांच के अधिकारियों और कर्मचारियों की एक टीम ने बताए गए ठिकाने पर अचानक छापा मारा। पुलिस ने मौके से गिरोह के सरगना और उसके पांच साथियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के पास से अलग-अलग बैंकों के 66 एटीएम कार्ड, 122 चेकबुक, 15 पासबुक, 12 मोबाइल कंपनियों के सिम कार्ड, दो कंप्यूटर, एक कलर प्रिंटर, दो पेनड्राइव और विभिन्न फर्जी कंपनियों की 68 रबर की स्टैम्प बरामद की हैं।
इसके अलावा अलग-अलग बैंकों के खाता खोलने वाले फॉर्म, बिजली के बिल और कई कंपनियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी जब्त किए गए हैं।इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ मुंबई के पायधुनी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर लिया है और क्राइम ब्रांच की यूनिट 2 को मामले की जांच सौंप दी गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को जब मुंबई की एक कोर्ट में पेश किया गया, तो कोर्ट ने उन्हें 8 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया।
मुंबई क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने बैंक खाते दुबई भेजे हैं और इनके तार किन-किन बड़े साइबर अपराधियों से जुड़े हैं।
