Review: हैरान कर देगी 'बेबी डू डाई डू', हुमा ने दिखाया खूंखार अंदाज
मुंबई में जब मॉनसून अपनी पूरी रफ्तार में होता है, तो शहर की रफ्तार थम सी जाती है. लेकिन इसी मूसलाधार बारिश और लोकल स्टेशनों
मुंबई में जब मॉनसून अपनी पूरी रफ्तार में होता है, तो शहर की रफ्तार थम सी जाती है. लेकिन इसी मूसलाधार बारिश और लोकल स्टेशनों की भारी भीड़ के बीच, एक फिल्म चुपचाप सिनेमा के पर्दे पर दस्तक देती है- 'बेबी डू डाई डू'. फिल्म की शुरुआत ही आपको अपनी सीट से बांध देती है, जहां आसमान से गिरती बारिश की बूंदें सड़कों पर शोर मचा रही हैं, लेकिन यह शोर जल्द ही एक अजीब सी घबराहट और सन्नाटे में बदल जाता है.
हर तरफ एक जैसे छातों का सैलाब उमड़ा है, मगर मुंबई के एक लोकल रेलवे स्टेशन पर एक लाल रंग का छाता सबका ध्यान खींचता है. यह लाल रंग मानो किसी आने वाले खतरे की घंटी है. इस छाते को थामे हुए महिला के चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं हैं, उसकी नजरें भीड़ में किसी बुजुर्ग को तलाश रही हैं.
वह बेहद शातिर तरीके से आगे बढ़ती है, अपने छाते को पोजीशन में लाती है और उसके हैंडल में छिपे ट्रिगर को दबा देती है. बिना किसी आवाज के एक गोली चलती है
और खेल खत्म. यह दमदार और रोंगटे खड़े कर देने वाली शुरुआत साफ कर देती है कि आगे स्क्रीन पर बदले की एक बेहद खूंखार और सस्पेंस से भरी कहानी सामने आने वाली है.
