चिंताजनक: 17 लाख उपग्रह और अंतरिक्ष दर्पण, तारों की दुनिया को बना देंगे इतिहास; वैज्ञानिकों की चेतावनी क्या?
यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ईएसओ) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशित हुए हैं।
यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ईएसओ) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन के अनुसार पृथ्वी की कक्षा में किसी भी समय अधिकतम लगभग 1 लाख अपेक्षाकृत मंद उपग्रह ही होने चाहिए। इसके विपरीत विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं की मौजूदा प्रस्तावित योजनाओं में 17 लाख से अधिक उपग्रहों और अंतरिक्ष दर्पणों को कक्षा में भेजने का लक्ष्य रखा गया है, जो इस सुरक्षित सीमा से 17 गुना अधिक है।रिपोर्ट के अनुसार यह चिंता मई 2019 में तब शुरू हुई, जब स्पेसएक्स ने अपनी स्टारलिंक इंटरनेट सेवा के पहले उपग्रह प्रक्षेपित किए।
लंबे एक्सपोजर में ली जाने वाली खगोलीय तस्वीरों पर इनकी चमकीली लकीरें दिखाई देने लगीं। उस समय पृथ्वी की कक्षा में लगभग 2,000 सक्रिय उपग्रह थे, जबकि अब उनकी संख्या 14,000 से अधिक हो चुकी है। निष्क्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष मलबे को मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 32,000 तक पहुंच जाता है। इसके साथ ही भविष्य के लिए 17 लाख से अधिक उपग्रहों और अंतरिक्ष दर्पणों की प्रस्तावित परियोजनाएं सामने आ चुकी हैं।ईएसओ के खगोलशास्त्री ओलिवियर हैनो ने पिछले 30 वर्षों के अनुभव और कंप्यूटर सिमुलेशन के आधार पर प्रस्तावित उपग्रहों के प्रभाव का आकलन किया।
उनके अनुसार यदि उपग्रह सामान्य आंखों से दिखाई न देने जितने मंद भी हों, तब भी उनकी संख्या लगभग 1 लाख से अधिक होने पर वेधशालाओं को होने वाला नुकसान मौसम या उपकरणों की खराबी से होने वाले सामान्य नुकसान के बराबर या उससे अधिक हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई कठोर सीमा नहीं है और यदि संख्या 50,000 के आसपास रहे तो स्थिति और बेहतर होगी।अध्ययन में स्पेसएक्स की उस प्रस्तावित योजना का भी विश्लेषण किया गया है, जिसमें भविष्य में कक्षा में डाटा सेंटर विकसित करने के उद्देश्य से लगभग 10 लाख अतिरिक्त उपग्रह भेजने का प्रस्ताव रखा गया है।
सिमुलेशन के अनुसार यदि यह योजना पूरी होती है तो चिली स्थित ईएसओ की वेरी लार्ज टेलीस्कोप से अंधेरा होने के दो घंटे बाद ली गई एक तस्वीर में दर्जनों उपग्रहों की लकीरें दिखाई देंगी और तस्वीर का लगभग 28% हिस्सा अनुपयोगी हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में उपग्रह वैज्ञानिक आंकड़ों के नुकसान का सबसे बड़ा कारण बन जाएंगे।
