MEA: इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग अभी शुरुआती चरण में; ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम सप्लाई पर प्रगति की उम्मीद
इस यात्रा को लेकर शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस वार्ता की। इसमें विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने कई सवालों के
इस यात्रा को लेकर शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस वार्ता की। इसमें विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने कई सवालों के जवाब दिए। इंडोनेशिया को और ब्रह्मोस मिसाइल देने के सवाल पर उन्होंने अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग हमारे द्विपक्षीय रिश्तों का एक बहुत जरूरी हिस्सा है। हालांकि, इस पर बातचीत अभी शुरुआती दौर में है।उन्होंने आगे कहा, अभी इस मामले की गहराई में जाने की कोई जरूरत नहीं है।
हम लोग अभी यहां से रवाना भी नहीं हुए हैं। सारी तैयारियां और बातचीत अभी शुरुआती चरण में ही हैं। इंडोनेशिया दौरे पर दोनों देशों की आपसी साझेदारी की समीक्षा पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा।दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (ओशिनिया) विश्वेश नेगी ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु आपूर्ति का समझौता काफी समय से है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस पर अमल नहीं हुआ। अब दोनों देशों के बीच इस विषय पर फिर से गंभीर और सकारात्मक बातचीत शुरू हुई है।
सरकार को उम्मीद है कि इस चर्चा का जल्द ही कोई ठोस नतीजा निकलेगा। प्रधानमंत्री 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया में तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के आखिरी चरण में 11 जुलाई को न्यूजीलैंड जाएंगे। यह दौरा ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि पिछले 40 वर्षों में न्यूजीलैंड की यात्रा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।ब्रह्मोस मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस ने मिलकर तैयार किया है।
भारत अब इसे दुनिया के दूसरे देशों को निर्यात करना चाहता है। यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में भारत की ताकत को बढ़ाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रह्मोस की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भारत को एक बड़े हथियार निर्यातक के रूप में पहचान मिल रही है।
