ऑर्गनाइजर के 80 साल पूरे: उपराष्ट्रपति बोले- प्रेस के सही जानकारी देने और सवाल पूछने से मजबूत होता है लोकतंत्र
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रेस की आजादी तभी सार्थक है जब इसका इस्तेमाल साहस और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। उन्होंने 'ऑर्गनाइजर' की 80 साल
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रेस की आजादी तभी सार्थक है जब इसका इस्तेमाल साहस और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। उन्होंने 'ऑर्गनाइजर' की 80 साल की लंबी यात्रा की प्रशंसा की। उन्होंने इसे सार्वजनिक चर्चा के प्रति एक निरंतर प्रतिबद्धता बताया और राष्ट्रीय घटनाओं में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने आजाद भारत में स्वतंत्र प्रेस के विकास में 1949 में सेंसरशिप के खिलाफ इसकी कानूनी लड़ाई को एक अहम मोड़ बताया।उपराष्ट्रपति ने आपातकाल के दौरान 'ऑर्गनाइजर' और 'द मदरलैंड' अखबार की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि इन प्रकाशनों ने संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य केंद्र के रूप में काम किया।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर, चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी और राम जन्मभूमि आंदोलन जैसे गंभीर मुद्दों पर पत्रिका के सक्रिय जुड़ाव की भी चर्चा की।इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने दो किताबें भी जारी कीं। पहली किताब 'हिंदुत्व डिस्कोर्स आफ्टर इंडिपेंडेंस- रीडिंग विद ऑर्गनाइजर पेजेस' है।
(जिसे उन्होंने भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास का एक मूल्यवान अभिलेखीय रिकॉर्ड बताया) और दूसरी किताब का नाम 'टेम्पल्स बियॉन्ड' भारत है।
