कोलकाता में TMC मुख्यालय पर बागी गुट का कब्जा:ताले बदले, लेकिन ममता की फोटो नहीं हटाई; एक दिन पहले पार्टी सिंबल पर दावा किया था
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई में बागी नेताओं ने
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई में बागी नेताओं ने मेट्रोपॉलिटन में मुख्यालय के ताले बदल दिए, नए पोस्टर लगाए, इनमें ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं थी। हालांकि, कार्यालय के अंदर पहले से लगी ममता बनर्जी की तस्वीरों और कटआउट को नहीं हटाया गया। ऋतब्रत बनर्जी वरिष्ठ नेताओं और पार्टी के कोषाध्यक्ष के साथ TMC कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने बैठक की और दावा किया कि वही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। कहा कि अब से पार्टी का सारा काम इसी कार्यालय से चलेगा। एक दिन पहले ही बागी गुट ने चुनाव आयोग के सामने TMC के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश किया था। एक दिन पहले ही बागी गुट ने चुनाव आयोग के सामने TMC के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश किया था।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद 3 जून को TMC के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए थे। 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। कुनाल घोष पार्टी मुख्यालय में दाखिल नहीं हो पाए ममता बनर्जी समर्थक गुट के वरिष्ठ नेता कुनाल घोष कार्यालय पहुंचे, लेकिन गेट पर ताला लगे होने के कारण अंदर नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि जो लोग ये दावा कर रहे हैं, वे निर्दलीय चुनाव जीतकर नहीं आए थे। कार्यालय पर कब्जा राज्य प्रशासन और पुलिस की सहमति से किया गया है। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 17 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं।
अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। इसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसी बगावत 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया। 30 जून 2022 को शिंदे भाजपा के समर्थन से सीएम बन गए।
फिर दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया। 10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। स्पीकर ने विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दीं। इनकी सदस्यता भी रद्द नहीं की। इसी बीच, चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया। दो तिहाई होने पर मिल सकती है अलग दल की मान्यता