दिग्विजय करेंगे उज्जैन से अयोध्या तक 1000 KM पदयात्रा:राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे; कोर्ट में केस करेंगे; सोशल मीडिया नहीं चलाएंगे
यूपी के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा
यूपी के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा राजनीतिक और धार्मिक ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें कांग्रेस का प्रचार नहीं होगा और वे यात्रा के दौरान फेसबुक, एक्स (ट्विटर) समेत किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपए का चंदा दिया था। उनके पास आज भी चंदे की रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है।
वकीलों से चर्चा के बाद केस करेंगे दायर पूर्व सीएम ने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में मुकदमा दायर करेंगे और राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा हिसाब मांगेंगे। उनका कहना है कि यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। चंदा देने वालों को भी पदयात्रा का न्योता उन्होंने कहा कि पदयात्रा में उन सभी लोगों को आमंत्रित किया जाएगा, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था। किसी भी राजनीतिक दल का व्यक्ति यदि चंदे में पारदर्शिता चाहता है तो वह यात्रा में शामिल हो सकता है। यात्रा के दौरान वे चंदा देने वालों की रसीद और चेक की प्रतियां भी साथ लेकर चलेंगे।
वित्तीय अनियमितता पर चंदा वापस लेंगे दिग्विजय सिंह ने कहा कि भगवान राम के नाम पर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया था। ऐसे में यदि उस धन के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है तो वे अपना चंदा वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे। महाकाल मंदिर में बने गेस्ट हाउस पर भी सवाल पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान आरएसएस और वीएचपी की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र की कीमती जमीन पर आरएसएस से जुड़े ट्रस्ट ने गेस्ट हाउस बनाया और अब वहां 100 कमरों का होटल तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि वहां ठहरने वालों को वीआईपी दर्शन की सुविधा मिलती है और चंदे के उपयोग की भी जांच होनी चाहिए। सभी मंदिर ट्रस्टों का हिसाब होना चाहिए उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं में आर्थिक पारदर्शिता जरूरी है और राम मंदिर ट्रस्ट सहित सभी धार्मिक ट्रस्टों के चंदे का सार्वजनिक हिसाब होना चाहिए। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाएंगे, जिस पर लिखा होगा— “मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।”