ज्यादा गुस्सा करने वाला होता है मंदबुद्धि! ऐसे करें खुद को कंट्रोल
Chanakya Niti: एक बार चंद्रगुप्त ने आचार्य चाणक्य से सवाल किया कि, 'गुरुदेव, मैं युद्ध के मैदान में अपने शत्रुओं को हरा सकता हूं, लेकिन
Chanakya Niti: एक बार चंद्रगुप्त ने आचार्य चाणक्य से सवाल किया कि, 'गुरुदेव, मैं युद्ध के मैदान में अपने शत्रुओं को हरा सकता हूं, लेकिन अपने भीतर उठते क्रोध को नहीं.
छोटी-छोटी बातों पर मेरा मन भड़क उठता है. उस समय मैं यह भी भूल जाता हूं कि मैं क्या कह रहा हूं और सामने कौन है. बाद में जब
क्रोध शांत होता है, तो मुझे अपने शब्दों पर पछतावा होता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.' आचार्य चाणक्य ने उत्तर देते हुए कहा कि,
'चंद्रगुप्त, क्रोध वह अग्नि है जो सबसे पहले उसी को जलाती है, जिसमें वह उत्पन्न होती है. लेकिन यदि तुम इसे समझ लो, तो इसे नियंत्रित भी कर सकते हो.'
