भाजपा के दक्षिण के प्रवेश द्वार पर गुटबाजी का ग्रहण?: कर्नाटक में विजयेंद्र के खिलाफ मोर्चा, ऐसे बढ़ी परेशानी
दरअसल बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों मात खाने के बाद पार्टी की निगाहें कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर टिकी रही। तब पार्टी नेतृत्व
दरअसल बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों मात खाने के बाद पार्टी की निगाहें कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर टिकी रही। तब पार्टी नेतृत्व को लगता था कि सिद्घरमैया बनाम डीके शिवकुमार की जंग संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी। हालांकि शिवकुमार के हाथों शांतिपूर्व सत्ता हस्तांतरण के बाद विधान परिषद चुनाव में भाजपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने नेतृत्व के सामने संभावनाओं का द्वार खोलने के बदले अंतहीन संकट का द्वार खोल दिया है।क्रॉस वोटिंग के बाद विधायकों की पहचान के लिए विजयेंद्र ने भगवान मंजूनाथ के मंदिर में विधायक दल की बैठक बुलाने की योजना बनाई थी।
हालांकि पार्टी के एक गुट के तीखे विरोध के बाद विजयेंद्र को अपनी योजना टालनी पड़ी। हालांकि पलटवार के रूप में उनके गुट के नेता एचके सुरेश ने मंजूनाथ मंदिर में शपथ ली और सभी विधायकों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की। क्रॉस वोटिंग मामले में तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद भी नेतृत्व ने अब तक दोषी विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।सत्ता से विदाई के बाद जब राज्य संगठन की कमान पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के पुत्र बीवाई विजयेंद्र को सौंपी गई, तभी से गुटबाजी शुरू हो गई थी।
शुरुआत में इस गुटबाजी के कारण बसनगौड़ा पाटिल यतनाल पार्टी से निष्कासित हुए तो केएस ईश्वरप्पा ने खुद पार्टी से दूरी बना ली। हालांकि क्रॉस वोटिंग और विजयेंद्र को दोबारा संगठन की कमान दिए जाने के संकेत के बाद गुटबाजी सतह पर आ गई। राज्य में पूर्व सीएम डीवी सदानंद गौड़ा, एसआर विश्वनाथ, बसवराज बोम्मई सहित कई अन्य सक्रिय गुट हैं। इनमें गौड़ा गुट ने खुल कर विजयेंद्र और नेता प्रतिपक्ष आर अशोक को पद से हटाने की मुहिम छेड़ रखी है।इस बीच राज्य में पूर्व सीएम सदानंद गौड़ा का कथित ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र को हटाने की बात कर रहे हैं।
एक अन्य मामले में गौड़ा अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ विधायक एसआर विश्वनाथ पर अंडरवर्ल्ड से संबंध रखने का आरोप लगा रहे हैं।दक्षिणी राज्यों केरल और तमिलनाडु में हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा औसत प्रदर्शन कर पाई। तेलंगाना में भी पार्टी कर्नाटक की तरह गुटबाजी का शिकार है। आंध्र प्रदेश में सियासत की चाभी तेलुगुदेशम पार्टी के पास है।
