NITI Aayog: आयुर्वेद के लिए बने विश्व महासंघ, ग्लोबल रजिस्टर का दिया सुझाव; बढ़ेगा निर्यात और मेडिकल टूरिज्म
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आयुर्वेद और योग के लिए एक विश्व महासंघ बनाने की सलाह दी है। आयोग चाहता है कि सरकार आयुर्वेदिक
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आयुर्वेद और योग के लिए एक विश्व महासंघ बनाने की सलाह दी है। आयोग चाहता है कि सरकार आयुर्वेदिक दवाओं के निर्यात के लिए एक विशेष मानक (फार्माकोपिया-निर्यात संस्करण) तैयार करे। इसके अलावा, व्यापार पर नजर रखने के लिए एक रियल-टाइम आयुर्वेद ट्रेड डैशबोर्ड बनाने का भी सुझाव दिया गया है। आयोग ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया है।भारत में आयुर्वेद एक अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त और नियंत्रित चिकित्सा पद्धति है।
देश में 3,55,000 से अधिक प्रशिक्षित आयुर्वेद डॉक्टर हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी संख्या अभी कम है। दुनिया भर के कुल योग्य आयुर्वेद पेशेवरों में से 95 प्रतिशत भारत में ही रहते हैं।रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेद उत्पाद अब लगभग 150 देशों में भेजे जा रहे हैं। साल 2014 में इनका निर्यात 1.09 अरब डॉलर था, जो 2023 में बढ़कर 2.16 अरब डॉलर हो गया है। आयुर्वेद के वैश्विक होने से आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। इससे स्वास्थ्य उत्पादों के बाजार, वेलनेस सेवाओं और मेडिकल टूरिज्म में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि आयुर्वेद को वैश्विक बनाने से भारत पारंपरिक चिकित्सा में दुनिया का नेता बन सकता है।
इससे रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और निर्यात मजबूत होगा। आयोग के सदस्य एम श्रीनिवास ने बताया कि इसका मकसद सिर्फ बाजार बढ़ाना नहीं है, बल्कि दुनिया भर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के विकल्प देना है।आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पिछले दस वर्षों में आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए कई बड़े काम हुए हैं। यह रिपोर्ट मंत्रालय के प्रयासों को और मजबूती देगी। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एक्विनो विमल ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए आयुर्वेद को आगे बढ़ाने की बात कही।नीति आयोग के स्वास्थ्य विभाग ने 'प्राइसवाटरहाउसकूपर्स' (PwC) के साथ मिलकर यह अध्ययन किया है।
इसमें विशेषज्ञों से सलाह ली गई और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर विश्लेषण किया गया है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद के सामने आने वाली चुनौतियों को पहचानना और अवसरों का लाभ उठाना है।
