पानी भरी गली बनी मौत की वजह: किशोरी की करंट लगने से मौत; टॉरेंट पावर के अधिकारियों पर क्यों दर्ज हुई FIR?
मुंब्रा के कौसा इलाके में बुधवार रात अपनी रिहायशी इमारत के बाहर पानी से भरे हिस्से में करंट फैल जाने से 17 वर्षीय एक किशोरी
मुंब्रा के कौसा इलाके में बुधवार रात अपनी रिहायशी इमारत के बाहर पानी से भरे हिस्से में करंट फैल जाने से 17 वर्षीय एक किशोरी की दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में कथित लापरवाही के आरोप में टॉरेंट पावर लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान आलिया मोहम्मद साजिद चांदीवाला के रूप में हुई है। बताया गया कि भारी बारिश के बीच बुधवार रात करीब 8:30 बजे वह कौसा स्थित यास्मीन अपार्टमेंट से बाहर निकल रही थी। इसी दौरान इमारत के लोहे के गेट के पास पानी में फैले करंट की चपेट में आ गई।
माना जा रहा है कि बिजली का करंट किसी लीकेज के कारण पानी में फैल गया था। घटना के तुरंत बाद परिजन और स्थानीय लोग आलिया को पास के अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।आलिया के पिता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि इलाके के लोगों ने 15 जून को टॉरेंट पावर की आधिकारिक व्हाट्सऐप हेल्पलाइन पर बार-बार वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और बिजली संबंधी समस्याओं की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद कंपनी की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।परिवार की शिकायत के आधार पर मुंब्रा पुलिस ने टॉरेंट पावर लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ कथित लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां कैसे बनीं।मुंब्रा की घटना के एक दिन पहले भिवंडी में भी करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई थी। यह हादसा बुधवार को तीन बत्ती इलाके में हुआ। मृतक की पहचान 26 वर्षीय मुस्तफा शेख के रूप में हुई है। वह एक मिठाई की दुकान पर काम करता था। उसके परिवार में पत्नी और एक बच्चा है।पुलिस के मुताबिक, मुस्तफा शेख पास के एक मंदिर से धातु का कंटेनर लेने गया था। लौटते समय वह कथित तौर पर एक खुले लाइव बिजली के तार की चपेट में आ गया, जिससे उसे जोरदार करंट लगा।
गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।घटना के बाद मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मंदिर प्रबंधन और बिजली कंपनी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद बिजली कंपनी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और खुली वायरिंग को छिपाने की कोशिश करने लगे। हालांकि, एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
