Bengaluru Quarry Tragedy: पत्थर गिरने के कारण पर पुलिस क्या बोली? MLA ने अवैध खनन के आरोप लगाए; रेस्क्यू जारी
क्या पुलिस ने हादसे की वजह बताई है? घटनास्थल पर क्या हुआ और कितने लोग हताहत हुए? प्रत्यक्षदर्शी मजदूर ने क्या दावा किया?
क्या पुलिस ने हादसे की वजह बताई है? घटनास्थल पर क्या हुआ और कितने लोग हताहत हुए? प्रत्यक्षदर्शी मजदूर ने क्या दावा किया? क्या मुख्यमंत्री ने क्या कहा और जांच में क्या सामने आया? क्या विधायक ने अवैध खनन के आरोप लगाए? राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं ने क्या कहा? अब आगे क्या होगा और रेस्क्यू ऑपरेशन कहां तक पहुंचा? शुरुआती जांच में पुलिस ने इस हादसे के पीछे संभावित लापरवाही की ओर संकेत किया है। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल पर दो अलग-अलग खदानें संचालित हो रही थीं। ऊपरी खदान में जेसीबी मशीन से चट्टानों को हटाया जा रहा था। इसी दौरान एक विशाल पत्थर नीचे स्थित दूसरी खदान की ओर लुढ़क गया और वहां काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ा। हादसे के समय नीचे की खदान में 16 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें सात की मौके पर ही मौत हो गई, पांच घायल हो गए और चार मजदूर किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहे।केंद्रीय क्षेत्र के आईजीपी एस. गिरीश ने बताया कि दोनों खदानों के अलग-अलग मालिक हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ऊपरी खदान में चल रही खुदाई के दौरान जेसीबी से धकेला गया बड़ा पत्थर नीचे की खदान में जा गिरा। पुलिस के अनुसार, यही हादसे की मुख्य वजह प्रतीत होती है। अधिकारियों ने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और कहीं मानवीय लापरवाही तो इस हादसे का कारण नहीं बनी।हादसा गुरुवार सुबह मदपट्टना स्थित कावेरी क्रशर यूनिट में हुआ।
पुलिस के मुताबिक, मृतकों की पहचान रामू, राजपाल सिंह, सत्यनारायण सिंह, राम अवतार सिंह, राजेंद्र प्रसाद, नुहार और भुवनेश्वर सिंह के रूप में हुई है। इनमें अधिकांश मजदूर मध्य प्रदेश से थे, जबकि एक मजदूर कर्नाटक के यादगिर जिले का निवासी था। घायलों में एक मजदूर छत्तीसगढ़ का बताया गया है। हादसा इतना भीषण था कि कई शव बुरी तरह चट्टानों के नीचे दब गए, जिससे उनकी पहचान करने में भी कठिनाई हुई। घटनास्थल पर खड़े ट्रैक्टर, टिप्पर और अन्य भारी मशीनें भी क्षतिग्रस्त हो गईं।तमिलनाडु के मजदूर गोपी, जो इस हादसे में बाल-बाल बच गए, ने आरोप लगाया कि ऊपरी खदान में काम कर रहे कर्मचारियों ने नीचे मौजूद मजदूरों को कोई चेतावनी नहीं दी। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते सूचना मिल जाती तो सभी मजदूर सुरक्षित स्थान पर चले जाते। गोपी के अनुसार, वह पिछले आठ वर्षों से वहां काम कर रहे हैं और सामान्य तौर पर ऊपर काम शुरू होने से पहले नीचे काम कर रहे मजदूरों को सतर्क किया जाता है। इस बार ऐसा नहीं हुआ, जिसके कारण बड़ा हादसा हो गया। पुलिस ने उनके बयान को भी जांच का हिस्सा बनाया है।कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि सात मजदूरों की मौत बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार घटनास्थल पर ब्लास्टिंग नहीं हुई थी और विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि खदान कानूनी रूप से संचालित हो रही थी या नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया गया तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए।यशवंतपुर के विधायक एस.टी. सोमशेखर ने इस हादसे के लिए अवैध खनन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर खदानें चलाई जा रही थीं और इस बारे में उन्होंने पहले भी विधानसभा, याचिका समिति तथा संबंधित विभागों के सामने मुद्दा उठाया था। विधायक ने मांग की कि खान एवं भूविज्ञान विभाग, वन विभाग, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी तो ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के कारण कई मामलों को पहले दबा दिया गया था।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। राष्ट्रपति ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस दुर्घटना में लोगों की जान जाने की खबर बेहद दुखद है और प्रभावित परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है।
