Capf:सीएपीएफ बिल के विरोध में उतरे पूर्व अफसरों की हो रही जासूसी, परिजनों की भी तैयार हो रही खुफिया रिपोर्ट
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) के पूर्व अफसरों की जासूसी कराई जा रही है। पिछले कई दिनों से उनके घरों के आसपास संदिग्ध लोग घूम रहे
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) के पूर्व अफसरों की जासूसी कराई जा रही है। पिछले कई दिनों से उनके घरों के आसपास संदिग्ध लोग घूम रहे हैं। उन लोगों से जब वहां घूमने की वजह जानने की कोशिश होती है तो कोई जवाब नहीं मिलता। दूसरा, जिन पूर्व एवं मौजूदा अफसरों के परिजन अपनी मांगों के समर्थन में राजघाट या जंतर-मंतर पर पहुंचे थे, उनके चेहरे पहचान कर संबंधित अफसरों की 'खुफिया रिपोर्ट' तैयार हो रही है। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह एवं विभिन्न बलों के आधा दर्जन पूर्व आईजी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेसवार्ता में यह दावा किया है।अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन भी भेजा गया है।
पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, एक डीआईजी का निलंबन और 20 अफसरों का तबादला, यह भेदभावपूर्ण कार्रवाई है। डीआईजी बीसी पात्रा, जिन्हें एनएसजी से वापस आने के बाद त्रिपुरा में तैनात किया गया था, उन्हें सीसीएस रूल 10 (1) के तहत सस्पेंड कर दिया गया। उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी गई। सिंह के मुताबिक, पात्रा एवं दूसरे अफसरों को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। इन अफसरों ने सरकार या किसी शीर्ष अफसर के खिलाफ बयान नहीं दिया है। कैडर अफसरों ने अपने हित को लेकर कानूनी दायरे में अपना पक्ष रखा था। सरकार को सीएपीएफ के कैडर अफसरों की जायज मांग को पूरा करने की तरफ आगे बढ़ना चाहिए।अलायंस के महासचिव रणबीर सिंह ने आरोप लगाया है कि पूर्व अफसरों की जासूसी कराना शर्मनाक है।
उन्होंने कहा, एचआर सिंह एवं दूसरे कई पूर्व अफसरों को निशाना बनाया जा रहा है। शांतिपूर्वक तरीके से अपनी बात रखने वाली पैरामिलिट्री वीरांगनाओं के चेहरे सोशल मीडिया में तलाशे जा रहे हैं। राजघाट और जंतर-मंतर की फुटेज खंगाली जा रही है। बीएसएफ के पूर्व आईजी विकास चंद्रा ने कहा, सीएपीएफ के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है, जब 'ग्रुप ए कैडर' अधिकारी को जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले और उन्हें आरोपों की जानकारी दिए बिना ही निलंबित कर दिया गया है।एचआर सिंह ने सरकार को सीएपीएफ का एक विशेष सत्र बुलाने का सुझाव दिया है। उसमें सरकार के प्रतिनिधि, कैडर अफसर, पूर्व अधिकारी एवं जवानों को भी आमंत्रित किया जाए। इसके बाद सरकार को सीएपीएफ के नए कानून को वापस लेने पर विचार करना चाहिए।आईटीबीपी के पूर्व आईजी आनंद निंबाडिया ने कहा, इस मामले में एक एसआईटी गठित हो।
वह इस प्रकरण की जांच करे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से केस जीतने के बाद भी कैडर अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया है। अब इन अफसरों को 16 साल में पहली पदोन्नति मिल पा रही है। सीआरपीएफ के पूर्व आईजी आरके यादव ने कहा, हमें आईपीएस से कोई गुरेज नहीं है। हमारा केवल इतना कहना है कि कैडर अफसरों को भी नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए।
