गुजरात में 5 शावकों समेत 8 शेरों की मौत:बेबेसिया वायरस संक्रमण का अंदेशा, इसी से 2018 में 11 शेरों की मौत हुई थी
गुजरात में 5 शावकों समेत 8 शेरों की मौत: बेबेसिया वायरस संक्रमण का अंदेशा, इसी से 2018 में 11 शेरों की मौत हुई थी अमरेली गुजरात के गिर जंगल क्षेत्र में पिछले दो दिनों में 8 शेरों की मौत हो गई। इनमें 5 शावक शामिल हैं। शावकों में से दो
गुजरात में 5 शावकों समेत 8 शेरों की मौत: बेबेसिया वायरस संक्रमण का अंदेशा, इसी से 2018 में 11 शेरों की मौत हुई थी अमरेली गुजरात के गिर जंगल क्षेत्र में पिछले दो दिनों में 8 शेरों की मौत हो गई। इनमें 5 शावक शामिल हैं। शावकों में से दो की मौत संदिग्ध बाबेसिया वायरस से होने की आशंका जताई गई है। वहीं, तीन अन्य शेरों की प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष में जान गई। राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वनमंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि गिर जंगल में किसी बड़े संक्रमण या महामारी जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने बताया कि बेबेसिया वायरस से केवल दो शावकों की संदिग्ध मौतें जुड़ी हैं, बाकी तीन शावकों की मौत अन्य कारणों से हुई है। उन्होंने कहा कि वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीमें वायरस की जांच और उसके फैलाव को रोकने में जुटी हैं।
संदिग्ध शेरों की पहचान कर उनके सैंपल लिए जा रहे हैं। इससे पहले 2018 में बेबेसिया वायरस से ही एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी। अलग-अलग रेंज में हुई शावकों की मौत प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (वाइल्डलाइफ) जयपाल सिंह ने कहा कि ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इनमें कुछ भी असामान्य नहीं है। तीनों शावकों की मौत फॉरेस्ट के अलग-अलग रेंज में हुई है। इसलिए किसी महामारी जैसी स्थिति नहीं है। लिलिया रेंज में 1, सावरकुंडला रेंज और सरसिया रेंज में 1 शावक की मौत हुई है। इनमें से दो शावकों की मौत कमजोरी के कारण हुई। दो शावकों की मौत संदिग्ध है, जिसकी जांच की जा रही है। वहीं, दो शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, जबकि एक शेर की जान आपसी संघर्ष में गई है। शेरों की मौत का वायरस से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि आमतौर पर शावकों की जीवित रहने की दर आमतौर पर 50 फीसदी ही होती है। लेकिन गिर फॉरेस्ट में लगातार निगरानी, ट्रैकर्स और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाओं की वजह से शेरों की मृत्यु दर काफी कम है। 2018 में बेबेसिया वायरस से ही एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी। बेबेसिया वायरस क्या है? बेबेसिया एक बहुत ही गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों और वन्यजीवों में भी पाई जाती है। यह बेबेसिया नामक परजीवी (प्रोटोजोआ) द्वारा फैलती है। मलेरिया की तरह, ये परजीवी शरीर में प्रवेश करते हैं और सीधे लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देते हैं। वहीं, शेरों में यह परजीवी रोग किलनी द्वारा फैलता है। वायरस शेरों की लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इससे शरीर में गंभीर एनीमिया हो जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
एशियाई शेरों की संख्या 891 दर्ज की गई है गुजरात में एशियाई शेरों की कुल संख्या 891 है। सितंबर, 2025 में विधानसभा में CM भूपेंद्र पटेल ने शेरों की गिनती के बाद नए आंकड़े जारी किए थे। साल 2020 में 674 शेर थे, जो बढ़कर 891 हो गए हैं। साल 2025 में 10 अप्रैल से 13 मई के बीच अत्याधुनिक तकनीक से शेरों की गिनती की गई थी। इसके आधार पर यह आंकड़ा जारी किया गया था। गुजरात के 11 जिलों की 58 तहसीलों में शेरों की उपस्थिति दर्ज की गई है। राज्य के 7 जिलों... जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर, द्वारका, पोरबंदर और राजकोट जिलों तक शेरों की बसाहट दर्ज कई गई है। एशियाटिक लायंस से जुड़ी
