ISI के पूर्व अधिकारी से क्यों मिले राम माधव?: कांग्रेस ने खड़े किए सवाल, RSS से लेकर पीएम मोदी पर साधा निशाना
बंगलूरू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरिप्रसाद ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संबंधी बयान को लेकर भाजपा
बंगलूरू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरिप्रसाद ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संबंधी बयान को लेकर भाजपा पर गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप भी लगाया। इसके अलावा मंदिरों के दानपात्रों में कथित अनियमितताओं की जांच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के अनुरूप पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने की मांग की।हरिप्रसाद ने कहा, "हम राम माधव का जिक्र इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वह अगस्त में होने वाले ग्रेटर बंगलूरू अथॉरिटी (जीबीए) चुनाव के लिए भाजपा के प्रभारी हैं। जीबीए चुनावों के संदर्भ में कोलंबो जाकर आईएसआई अधिकारी से बातचीत करने का उद्देश्य क्या था? क्या विदेश मंत्रालय ने भारत की विदेश नीति राम माधव को सौंप दी है? क्या इसे आरएसएस को आउटसोर्स कर दिया गया है?"मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि राम माधव ने कोलंबो में पाकिस्तान की आईएसआई के एक सेवानिवृत्त मेजर जनरल से मुलाकात की थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दो महीने बाद लंदन में भी ऐसी ही एक बैठक हुई थी। उन्होंने कहा कि राम माधव को इन बैठकों का उद्देश्य स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा देश की नीतियों को उलटने का काम कर रहे हैं। हालांकि, राम माधव पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं।उन्होंने 27 जून को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा था, "यह पूरी तरह गलत तरीके से पेश किया गया है। यह कोई ट्रैक-2 संवाद नहीं था। यह आईआईएसएस का वार्षिक दक्षिण एशिया संवाद था, जिसमें भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ब्रिटेन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विद्वानों ने हिस्सा लिया था। पहले भी इस वार्षिक कार्यक्रम में सरकारी अधिकारी शामिल होते रहे हैं। इतने देशों की मौजूदगी में इसे ट्रैक-2 संवाद नहीं कहा जा सकता। मैंने दो दिन के पूरे सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था।
मुझे केवल एक सत्र में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। मैंने अपना वक्तव्य दिया और लौट आया। एक सामान्य घटना को बेवजह विवाद बनाया जा रहा है।"मंदिरों के दानपात्रों से जुड़े आरोपों पर हरिप्रसाद ने कहा कि अब मंदिरों में श्रद्धालुओं को दानपात्रों की सुरक्षा के लिए भी चेतावनी बोर्ड लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा, "अब नया बोर्ड लगाना पड़ेगा, जिसमें लिखा होगा- 'दानपात्र की भी सुरक्षा करें। सावधान, यहां ऐसे चोर हैं जो दानपात्र से भी पैसे चुरा लेते हैं।'" उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और गौ-रक्षा अभियानों से जुड़े कर्नाटक के एक नेता की संपत्ति की जांच कराने की मांग की।मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर पूछे गए सवाल के जवाब में हरिप्रसाद ने कहा कि कांग्रेस इस प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रही, बल्कि इसके कथित दुरुपयोग का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा, "हम एसआईआर के खिलाफ नहीं हैं।
