Explainer: अरुणाचल से जम्मू-कश्मीर तक तबाही; पहाड़ों में बार-बार बादल क्यों फट रहे हैं? जानें कारण और खतरे
बादल फटने के बाद तबाही इतनी बड़ी क्यों हो जाती है? बादल फटने के दौरान केवल तेज बारिश ही नहीं होती, बल्कि पहाड़ों से मिट्टी
बादल फटने के बाद तबाही इतनी बड़ी क्यों हो जाती है? बादल फटने के दौरान केवल तेज बारिश ही नहीं होती, बल्कि पहाड़ों से मिट्टी, बड़े पत्थर, पेड़, चट्टानें और गाद (सिल्ट) भी तेज बहाव के साथ नीचे आने लगते हैं। इससे पानी एक खतरनाक मलबे के बहाव में बदल जाता है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को नुकसान पहुंचा सकता है। तबाही बढ़ने की मुख्य वजहें हैं 1. संकरी घाटियां और खड़ी ढलानें: पहाड़ों में पानी को फैलने की जगह नहीं मिलती, इसलिए वह बहुत तेज गति से नीचे आता है और रास्ते में आने वाले मकान, सड़कें और पुल बहा ले जाता है।
2. अस्थायी झीलों का बनना और टूटना: कई बार भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता रुक जाता है और ऊपर पानी जमा होकर अस्थायी झील बन जाती है। अगर यह प्राकृतिक बांध टूट जाए, तो अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है और बड़े पैमाने पर तबाही मचाता है। 3. मानव गतिविधियां: नदी-नालों पर अतिक्रमण, पहाड़ काटकर सड़क और अन्य निर्माण कार्य, मलबे का गलत तरीके से निस्तारण, जंगलों की कटाई और संकरे पुल या पुलियां पानी के बहाव को रोक देती हैं।
इसके बाद जब यह रुकावट टूटती है, तो पानी और मलबा एक साथ तेजी से नीचे आता है, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। क्या जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही हैं बादल फटने की घटनाएं? विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में बादल फटने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इसकी एक बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है। वहीं, पहाड़ी इलाकों में बिना योजना के तेजी से हुए निर्माण कार्यों के कारण इन घटनाओं से होने वाला नुकसान भी बढ़ा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के साथ हवा लगभग सात प्रतिशत अधिक नमी अपने भीतर रोक सकती है। जब यही अतिरिक्त नमी कम समय में एक साथ बारिश के रूप में गिरती है, तो बहुत तेज और अत्यधिक वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे बादल फटने जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
