Vijaya Mehta Passes Away: दिग्गज थिएटर निर्देशक विजया मेहता का निधन, 91 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
अनुपम खेर ने लिखा कि उन्होंने फिल्मों राव साहेब और पेस्टनजी में विजया मेहता के साथ काम किया था। उस समय तक वह कई फिल्मों
अनुपम खेर ने लिखा कि उन्होंने फिल्मों राव साहेब और पेस्टनजी में विजया मेहता के साथ काम किया था। उस समय तक वह कई फिल्मों में अभिनय कर चुके थे, लेकिन विजया मेहता के साथ हर रिहर्सल ने उन्हें यह एहसास कराया कि अभिनय की कला कितनी विशाल है। उन्होंने कहा कि विजया मेहता कभी अपना ज्ञान दूसरों पर थोपती नहीं थीं, बल्कि अपने व्यवहार और काम के जरिए सिखाती थीं। वह कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करती थीं, बल्कि कलाकारों के काम का स्तर ऊंचा कर देती थीं।
उनकी सादगी, अनुशासन और विनम्रता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने भी विजया मेहता के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि विजया मेहता ने अपनी रचनात्मक सोच, शानदार निर्देशन और रंगमंच के प्रति समर्पण से मराठी ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय थिएटर को नई पहचान दी। उनका काम आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।विजया मेहता मुंबई के प्रयोगधर्मी थिएटर समूह रंगायन की संस्थापक सदस्यों में शामिल थीं। इस समूह में प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर, अभिनेता अरविंद देशपांडे और श्रीराम लागू भी शामिल थे।
उन्होंने 'एक शून्य बाजीराव' और 'अजब न्याय वर्तुलाचा' जैसे चर्चित नाटकों का निर्देशन किया। वहीं 'राव साहेब' और 'पेस्टनजी' जैसी फिल्मों के निर्देशन से भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। समानांतर सिनेमा में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा और उन्होंने 'कलयुग' तथा 'पार्टी' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों की खूब प्रशंसा हासिल की।4 नवंबर 1934 को बड़ौदा (अब वडोदरा) में जन्मी विजया मेहता का मूल नाम विजया जयवंत था। उन्होंने रंगमंच की शिक्षा मशहूर थिएटर गुरु इब्राहिम अल्काजी और आदि मर्जबान से प्राप्त की।
अपने लंबे और शानदार करियर में उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उन्हें वर्ष 1986 में पद्म श्री, 1975 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2012 में टैगोर रत्न और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। विजया मेहता के निधन से भारतीय रंगमंच और समानांतर सिनेमा ने अपनी एक ऐसी हस्ती को खो दिया है, जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
