अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से राहत नहीं: आवाज का नमूना देने पर रोक से इनकार, अदालत ने की क्या अहम टिप्पणी?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने टिप्पणी की कि जांच के लिए क्या आवश्यक है और क्या नहीं, यह तय करना अदालत का काम
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने टिप्पणी की कि जांच के लिए क्या आवश्यक है और क्या नहीं, यह तय करना अदालत का काम नहीं, बल्कि जांच एजेंसी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अदालत जांच एजेंसी को यह निर्देश नहीं दे सकती कि उसे जांच के दौरान कौन-सा साक्ष्य जुटाना चाहिए। इसके बाद न्यायमूर्ति घोष ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया और याचिका को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया, जो यह तय करेंगे कि मामले की सुनवाई किस पीठ के समक्ष होगी।यह मामला विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी की कथित भड़काऊ टिप्पणी से जुड़ी एफआईआर से संबंधित है, जिसकी जांच पश्चिम बंगाल सीआईडी कर रही है।
इससे पहले अभिषेक ने एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उस मामले में उन्हें 31 जुलाई तक अंतरिम संरक्षण मिला हुआ है। साथ ही अदालत ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया था।इसी जांच के सिलसिले में सीआईडी ने हाल ही में बिधाननगर अदालत से अभिषेक बनर्जी की आवाज का नमूना लेने की अनुमति मांगी थी। निचली अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए 30 जून को मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञ की मौजूदगी में वॉयस सैंपल लेने का निर्देश दिया था। सीआईडी ने इस संबंध में नोटिस भी उनके कालीघाट स्थित आवास पर पहुंचाया था।अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि संबंधित बयान उन्होंने सार्वजनिक राजनीतिक सभा में दिया था और उसके दिए जाने से इनकार भी नहीं किया गया है।
ऐसे में आवाज का नमूना लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि मूल मामला पहले से ही दूसरी पीठ के समक्ष लंबित है और उसमें अभिषेक बनर्जी को अंतरिम संरक्षण प्राप्त है, इसलिए अलग से अंतरिम राहत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर जांच में सहयोग नहीं किया जाता है तो जांच एजेंसी संबंधित पीठ के समक्ष आवश्यक कार्रवाई की मांग कर सकती है। मंगलवार को ही वॉयस सैंपल लिए जाने की तिथि निर्धारित थी।
हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद अब मामले की आगे की कार्रवाई और मुख्य न्यायाधीश द्वारा नई पीठ के गठन पर सभी की नजरें टिकी हैं।
