Lucknow, India

CBI करेगी त्विषा शर्मा डेथ केस की जांच, पति और सास पर दर्ज की FIR; SC की टिप्पणी के बाद लिया एक्शन

Published 25 May 2026 · india

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने त्विषा मौत मामले में न्यायपालिका के आरोपियों को बचाने की धारणा पर सोमवार को निराशा व्यक्ति की। कोर्ट ने कहा कि दुख हुआ यह सुनकर कि न्यायपालिका आरोपियों को बचा रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वे आम जनता से अनुरोध करते

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने त्विषा मौत मामले में न्यायपालिका के आरोपियों को बचाने की धारणा पर सोमवार को निराशा व्यक्ति की। कोर्ट ने कहा कि दुख हुआ यह सुनकर कि न्यायपालिका आरोपियों को बचा रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वे आम जनता से अनुरोध करते हैं कि वो अटकलों से बचे और सबसे प्रमुख जांच एजेंसी (सीबीआइ) पर भरोसा रखे। कहा कि उसे पूरा यकीन है कि सही समय आने पर एजेंसी जांच को उसके अंजाम तक जरूर पहुंचाएगी। CBI करेगी त्विषा शर्मा केस की जांच CBI ने इस मामले में BNS की धारा 80(2), 85, और 3(5) के तहत, साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत एक मामला दर्ज किया है। सीबीआई की दर्ज की गई FIR के मुताबिक, त्विषा की शादी 9 दिसंबर, 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी।

शादी के बाद से ही ससुराल वालों पर दहेज को लेकर उत्पीड़न करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि त्विषा को लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। इस मामले में आरोपी के तौर पर जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे हैं गिरिबाला सिंह (सास) और समर्थ सिंह (पति)। FIR के मुताबिक, त्विषा की मौत की जानकारी 12 मई, 2026 की रात करीब 10:20 बजे मिली। पुलिस और मेडिकल जांच में पता चला कि महिला की मौत फांसी लगाने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने 'एंटीमॉर्टम हैंगिंग' (antemortem hanging) की पुष्टि की, जिसका मतलब है कि फांसी तब लगाई गई थी जब पीड़िता जीवित थी। इसके अलावा, शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोट के निशान पाए गए, जिनके बारे में माना गया कि वे किसी भारी वस्तु या शारीरिक हमले के कारण लगे थे।

FIR के अनुसार, मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही अतिरिक्त दहेज की मांग की जा रही थी। खबरें और भी मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की धारा 6 के तहत अपनी सहमति देते हुए इस मामले को CBI को सौंप दिया। इसके बाद, 25 मई, 2026 को केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने एक अधिसूचना जारी की, जिसमें CBI को पूरे मध्य प्रदेश राज्य में जांच करने का अधिकार दिया गया। CBI अब इस मामले में दहेज मृत्यु, उत्पीड़न, आपराधिक साजिश और अन्य संभावित अपराधों के आरोपों की जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की वैधता पर कोई राय व्यक्त नहीं की है, सभी पहलुओं की जांच करना जांच एजेंसी का काम है।

कोर्ट ने पीड़ित परिवार से अनुरोध किया कि वो सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाए जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं। साथ ही मीडिया से भी अनुरोध किया कि वह गवाहों और संभावित आरोपियों के बयान रिकॉर्ड न करे, ऐसा करने से जांच प्रभावित हो सकती है। ये आदेश और टिप्पणियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने त्विषा शर्मा मौत मामले में स्वत: संज्ञान लेकर की जा रही सुनवाई के दौरान दिए।

Read full story on TheBriefWire

Loading…