FATF: पाकिस्तान को फिर से एफएटीएफ की ग्रे सूची में डालने की तैयारी, क्या भारत के इस कदम से घबराया इस्लामाबाद?
भारत की कोशिश है कि पाकिस्तान को एफएटीएफ के निगरानी तंत्र के दायरे में वापस लाया जाए। 'ग्रे लिस्ट' में शामिल देशों को एफएटीएफ की
भारत की कोशिश है कि पाकिस्तान को एफएटीएफ के निगरानी तंत्र के दायरे में वापस लाया जाए। 'ग्रे लिस्ट' में शामिल देशों को एफएटीएफ की कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ता है और मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद वित्तपोषण और परमाणु प्रसार वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए उनकी व्यवस्थाओं में मौजूद रणनीतिक कमियों को दूर करने के लिए समय-समय पर उनकी समीक्षा की जाती है।
ऐसे देशों को वैश्विक वित्तीय संस्थानों से धन प्राप्त करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।40 सदस्यीय एफएटीएफ आतंकवाद के वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों के कारोबार और साइबर धोखाधड़ी जैसे अपराधों से जुड़े अवैध वित्तीय लेन-देन के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई का नेतृत्व करता है। यह संस्था विभिन्न देशों की निगरानी करती है ताकि वे अवैध वित्तीय गतिविधियों के सुरक्षित ठिकाने न बनें और इस दिशा में वैश्विक मानक भी तय करती है।पाकिस्तान लंबे समय तक एफएटीएफ की 'ग्रे लिस्ट' में रहा है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और संभावित वित्तीय प्रतिबंधों के खतरे के बीच उसे एफएटीएफ की शर्तें स्वीकार करनी पड़ीं, जिसके बाद अक्तूबर 2022 में ही उसका नाम ग्रे लिस्ट से हटाया गया। हालांकि एफएटीएफ और उसकी क्षेत्रीय सहयोगी संस्था एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग (APG) अब भी पाकिस्तान की निगरानी कर रहे हैं।संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल को हाल ही में एफएटीएफ का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
ऐसे में भारत का इस बात पर जोर है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरा जाए और उसे आतंकी वित्तीय प्रणाली के उपयोग के लिए जवाबदेह ठहराया जाए।
