50% तक बढ़ेगी लोकसभा की सीट?: सरकार कर रही विचार, महिला आरक्षण पर संविधान संशोधन बिल के नए प्रारूप की तैयारी
नया प्रारूप मुख्य रूप से दक्षिण के राज्यों के इस डर को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से
नया प्रारूप मुख्य रूप से दक्षिण के राज्यों के इस डर को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से लोकसभा में उनका सियासी प्रभाव घट जाएगा। 17 अप्रैल को लाया गया पहला विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। नए प्रारूप में वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव दिया गया है।
वर्तमान जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं होनेे से लोकसभा-विधानसभा सीटों का पुनर्गठन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस विधेयक को संसद में तभी पेश करेगी, जब वह बहुमत को लेकर पूर्णत: आश्वस्त हो जाएगी। वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास करीब 300 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं।
दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे 360 मतों की जरूरत है।सरकार की योजना के अनुसार, पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन करके वर्ष 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को क्रियाशील करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाएगा।अप्रैल में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने हेतु राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी।
विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी।
