सबरीमाला सोना गबन मामला: हाईकोर्ट ने दी पूर्व TDB अध्यक्ष के खिलाफ नए केस की अनुमति दी, एसआईटी को मिले सबूत
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने कहा कि एसआईटी चाहे तो वर्ष 2025 में प्रतिमाओं पर दोबारा सोने की
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने कहा कि एसआईटी चाहे तो वर्ष 2025 में प्रतिमाओं पर दोबारा सोने की परत चढ़ाने के मामले में नया केस दर्ज कर सकती है या फिर अपने निष्कर्षों को वर्ष 2019 में सोना गायब होने के आरोपों की चल रही जांच में शामिल कर सकती है।हाईकोर्ट के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया था। उसे द्वारपालक प्रतिमाओं और श्रीकोविल (गर्भगृह) के सोने की परत चढ़े दरवाजों के चौखटों से कथित तौर पर सोना गायब होने के दो मामलों की जांच सौंपी गई थी। इन्हें वर्ष 2019 में दोबारा सोने की परत चढ़ाने के लिए चेन्नई ले जाया गया था।जांच अधिकारी एस. शशिधरन ने अदालत में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि जांच में ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कथित साजिश केवल मूल आरोपियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें टीडीबी के अन्य अधिकारी और सदस्य भी शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 1998 में जिन द्वारपालक प्रतिमाओं पर सोने की परत चढ़ाई गई थी, उन्हें वर्ष 2019 में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के कहने पर चेन्नई भेजा गया।रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि चेन्नई में दोबारा सोने की परत चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमाओं से मूल सोने की परत हटा दी गई। नई परत चढ़ाने के लिए केवल थोड़ी मात्रा में सोने का इस्तेमाल किया गया, जबकि बाकी सोने का कथित तौर पर गबन कर लिया गया।रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि काम की गुणवत्ता खराब होने के बावजूद संदेह से बचने के लिए झूठा प्रमाणपत्र जारी किया गया, जिसमें सोने की परत पर 40 साल की वारंटी होने का दावा किया गया। हालांकि, कुछ ही महीनों में परत खराब हो गई और उसके नीचे की तांबे की सतह दिखाई देने लगी।एसआईटी के अनुसार, इसके बाद आरोपियों ने वर्ष 2019 में कथित तौर पर किए गए गबन को छिपाने के लिए एक और आपराधिक साजिश रची।
इसके तहत नई सोने की परत चढ़ाने के नाम पर प्रतिमाओं को फिर से चेन्नई भेजने की योजना बनाई गई। एसआईटी का आरोप है कि नवंबर 2023 में पी. एस. प्रशांत के टीडीबी अध्यक्ष बनने के बाद उन्नीकृष्णन पोट्टी ने उनका विश्वास जीता और दोबारा सोने की परत चढ़ाने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें राजी किया।एसआईटी ने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड के सदस्यों ने यह जानते हुए भी प्रतिमाओं को दोबारा चेन्नई भेजने के फैसले में सहयोग किया कि यह देवस्वम मैनुअल और हाईकोर्ट के पहले के निर्देशों का उल्लंघन है तथा इसका उद्देश्य वर्ष 2019 में कथित तौर पर हुए गबन को छिपाना था।एसआईटी का दावा है कि आरोपियों और बोर्ड अधिकारियों के बीच हुए पत्राचार से पता चलता है कि कुछ अधिकारी और सदस्य जानते थे कि वर्ष 2019 में प्रतिमाओं से हटाया गया बचा हुआ सोना अब भी उन्नीकृष्णन पोट्टी के पास था।
इसके बावजूद सुधारात्मक कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने कथित तौर पर चोरी और गबन को छिपाने में सहयोग किया।
