पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक पारित: बिना मुकदमे 12 महीने तक हिरासत,नए कानून में क्या है खास?
सरकार का कहना है कि नया कानून राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, संगठित हिंसा पर समय रहते नियंत्रण करने और सार्वजनिक एवं निजी
सरकार का कहना है कि नया कानून राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, संगठित हिंसा पर समय रहते नियंत्रण करने और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है। विधेयक में गंभीर मामलों में असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों को बिना मुकदमे अधिकतम 12 महीने तक निवारक निरुद्ध (प्रिवेंटिव डिटेंशन) में रखने का प्रावधान किया गया है।विधानसभा में चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह कानून किसी आम नागरिक के खिलाफ नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जो दंगा, उगाही, संगठित हिंसा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों में शामिल रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य में शांति, सुरक्षा और कानून का प्रभावी शासन सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, मौजूदा कानूनी व्यवस्था में हिंसा के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने के पर्याप्त प्रावधान नहीं थे। नए कानून के माध्यम से इस कमी को दूर किया गया है।उन्होंने कहा कि अब सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की जवाबदेही तय करने के साथ उनसे क्षतिपूर्ति भी वसूली जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि कानून का किसी भी प्रकार के राजनीतिक उद्देश्य से दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल कानून में निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में हिंसक घटनाओं और संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले वर्षों के अनुभवों से यह महसूस किया गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिक प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।
उन्होंने सभी दलों से राज्य को हिंसा और असामाजिक गतिविधियों से मुक्त बनाने के लिए सहयोग की अपील की। विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद नया कानून प्रभावी होगा।सरकार के अनुसार, मौजूदा कानून कई मामलों में पर्याप्त प्रभावी नहीं थे। विशेष रूप से दंगा और हिंसा के दौरान सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने और संगठित हिंसा की समय रहते रोकथाम के लिए नए कानूनी प्रावधानों की
आवश्यकता महसूस की गई। सरकार का दावा है कि यह कानून राज्य में शांति, निवेश और सामान्य जनजीवन की सुरक्षा को मजबूत करेगा।-गंभीर मामलों में बिना मुकदमे अधिकतम 12 माह तक निवारक निरुद्ध(प्रिवेंटिव डिटेंशन) का प्रावधान।-दंगा, उगाही, संगठित हिंसा और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण का उद्देश्य।-सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने की व्यवस्था।-कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विशेष कानूनी ढांचा।-सरकार का दावा-कानून का उद्देश्य आम नागरिक नहीं, बल्कि हिंसक और संगठितअसामाजिक तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।
