'जांच एजेंसी के पास केस चलाने का हक': साल्वे ने समझाई कानूनी प्रक्रिया, क्या US में खत्म होगा अदाणी मामला?
अमेरिका में केस चलाने का अंतिम फैसला न्याय विभाग का ही होता है। जज की ओर से मामले को वापस लेने की वजह पूछना पूरी
अमेरिका में केस चलाने का अंतिम फैसला न्याय विभाग का ही होता है। जज की ओर से मामले को वापस लेने की वजह पूछना पूरी तरह से रूटीन कानूनी कदम है। भारतीय अदालतों की तुलना में अमेरिकी कोर्ट सरकारी वकीलों के फैसले में दखल नहीं देते। गौतम अदाणी और सागर अदाणी पर लगे आरोपों को हटाने के लिए विभाग खुद कोर्ट पहुंचा है। सरकारी एजेंसी की तरफ से लिखित जवाब दाखिल होते ही कोर्ट केस बंद कर देगा। लंदन से दिए एक विशेष इंटरव्यू में साल्वे ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद आसान भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि जब अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने ही यह केस दर्ज किया था, तो अब वही इसे वापस लेने की अर्जी भी दे रहा है। ऐसे में जज का वजह पूछना एक रूटीन प्रक्रिया है, इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।हरीश साल्वे के मुताबिक, भारत और अमेरिका की अदालतों में बड़ा अंतर है।
भारतीय अदालतें केस वापस लेने के फैसले की बहुत बारीकी से जांच करती हैं। इसके उलट, अमेरिकी सिस्टम में पूरी कमान पूरी तरह से न्याय विभाग (डीओजे) के हाथ में होती है। जज निकोलस गराउफिस ने सिर्फ औपचारिकता के तहत पूरी जानकारी मांगी है। न्याय विभाग अपनी रिपोर्ट सौंपेगा और बात वहीं खत्म हो जाएगी।दरअसल, अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने न्याय विभाग से साफ तौर पर पूछा था कि वे गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ दर्ज मामले को क्यों खारिज करना चाहते हैं। कोर्ट ने आदेश पर अंतिम मुहर लगाने से पहले विभाग से इसके ठोस कारण लिखित में मांगे हैं। इसी आदेश के बाद वैश्विक स्तर पर कई तरह के सवाल उठने लगे थे, जिन पर अब हरीश साल्वे ने विराम लगा दिया है।आसान भाषा में समझें तो यह पूरा मामला रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा है।
नवंबर 2024 में अमेरिका के न्यूयॉर्क की एक अदालत में अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और कुछ अन्य लोगों पर केस दर्ज किया था। आरोप था कि अदाणी समूह ने भारत में बड़े सोलर एनर्जी के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को करीब 250 मिलियन डॉलर (उस वक्त लगभग 2,100 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने का वादा किया था। चूंकि इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका के निवेशकों से पैसे जुटाए गए थे और अमेरिकी शेयर बाजार के नियमों का इस्तेमाल हुआ था, इसलिए अमेरिकी कानून के मुताबिक वहां की सरकार ने इसे 'अमेरिकी निवेशकों के साथ धोखाधड़ी' मानते हुए आपराधिक मामला दर्ज कर लिया था।इस मामले में नया मोड़ तब आया जब मई 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने अचानक यू-टर्न ले लिया। सरकार के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि वे अब इस केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और अदाणी पर लगे सभी आपराधिक आरोपों को खारिज करना चाहते हैं।
जब कोर्ट के जज निकोलस गराउफिस ने पूछा कि आप इतना बड़ा केस अचानक क्यों बंद कर रहे हैं, तो इसी पर सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने समझाया कि अमेरिका में यह सामान्य बात है। वहां की सरकार के पास यह पावर होती है कि वह तय करे कि उसे किस पर केस चलाना है और किस पर नहीं।वहीं, अदाणी समूह ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) और ट्रेजरी विभाग के साथ भारी जुर्माना (लगभग $281 मिलियन से ज्यादा) भरकर अपने दीवानी विवाद पहले ही सुलझा लिए हैं, इसलिए अमेरिकी सरकार अब इस आपराधिक केस को पूरी तरह बंद करने जा रही है।
