केरल में सियासी दंगल: Bjp-कांग्रेस पार्षदों में भिड़ंत, हुई तू-तू,मैं-मैं; पार्षद की कुर्सी पर बवाल क्यों?
पूरे विवाद की जड़ भाजपा पार्षद सुगथन की गिरफ्तारी है। माकपा (सीपीआईएम) और एलडीएफ के पार्षदों ने सुगथन को पद से हटाने की मांग को
पूरे विवाद की जड़ भाजपा पार्षद सुगथन की गिरफ्तारी है। माकपा (सीपीआईएम) और एलडीएफ के पार्षदों ने सुगथन को पद से हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल रखा है। सुगथन को हाल ही में केरल असामाजिक गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (कापा) के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह इस समय विय्यूर केंद्रीय कारागार में बंद हैं। एलडीएफ का साफ कहना है कि गंभीर आपराधिक मामले में जेल में बंद व्यक्ति को पार्षद पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।काउंसिल की बैठक जैसे ही शुरू हुई, एलडीएफ के पार्षद हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन करने लगे।
इन तख्तियों पर पार्षद सुगथन के इस्तीफे की मांग लिखी हुई थी। एलडीएफ सदस्यों ने मेयर के कक्ष के बाहर धरना भी दिया। माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया जब मेयर वीवी राजेश और डिप्टी मेयर आशा नाथ वहां पहुंचे। वामपंथी पार्षदों ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की, जिससे विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। इस पूरे घटनाक्रम में व्यापक हिंसा देखने को मिली। दोनों पक्षों के बीच हुई तीखी नोकझोंक और मारपीट में कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर है।त्रिवेंद्रम नगर निगम में भाजपा के पार्षद आर.
सुगथन पर मार्च महीने में एक मंदिर के त्योहार के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगा। पुलिस ने इसे बहुत गंभीर माना और सुगथन को कापा कानून के तहत बिना अदालत के जेल भेज दिया। गिरफ्तारी के समय उनके समर्थक विरोध करने लगे, जिससे पुलिस को हवा में गोली चलानी पड़ी।वामपंथी पार्षद कहते हैं कि ऐसे गंभीर आरोप वाले व्यक्ति को पार्षद नहीं रहना चाहिए, इसलिए वे सुगथन का इस्तीफा मांग रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
भाजपा इसे राजनीतिक साजिश बताती है और सुगथन का पूरा साथ दे रही है। इसी वजह से निगम की बैठक में कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच झड़प हो गई।
