पुणे में 65 साल के रेप-मर्डर के दोषी को फांसी:3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था; फास्टट्रैक कोर्ट का 60 दिन में फैसला
महाराष्ट्र के पुणे जिले में 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 65 साल के दोषी
महाराष्ट्र के पुणे जिले में 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 65 साल के दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का बताते हुए कहा कि आरोपी का कृत्य बेहद क्रूर, अमानवीय और बर्बर था। सोमवार सुबह 11 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी को अदालत में पेश किया गया था। कांबले पेशे से मजदूर हैं। वह 7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों के दादा हैं। बच्ची गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आई हुई थी यह घटना 1 मई को पुणे जिले के नसरापुर गांव में हुई थी।
बच्ची गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आई हुई थी। दोपहर 3 से 4 बजे के बीच कांबले ने उसे खाने-पीने की चीजें और गाय का नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद वह उसे मवेशियों के तबेले के पास बने एक शेड में ले गया, जहाँ उसने उसके साथ रेप किया और फिर उसकी हत्या कर दी। कोर्ट ने सजा पर फैसला 29 जून के लिए सुरक्षित रखा था मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई थी। जस्टिस सालुंखे ने सजा पर फैसला 29 जून के लिए सुरक्षित रखा था।
दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने कांबले से पूछा कि उसे क्या सजा दी जानी चाहिए। इस पर कांबले ने कहा कि उसने कोई अपराध नहीं किया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी में न तो पश्चाताप के कोई संकेत दिखाई दिए और न ही उसके सुधरने की कोई संभावना है। ऐसे में उसके लिए केवल मृत्युदंड ही उचित सजा है। बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक अजय मिसर ने 55 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे।
इनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, पीड़िता के परिजन और बाल गवाह शामिल थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान दर्ज किए गए थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पोटेंसी टेस्ट और मेंटल फिटनेस असेसमेंट को वैध और पर्याप्त साक्ष्य माना।