Lucknow, India

'कब बनेगी चयन समिति', DERC नियुक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा सवाल

Published 25 May 2026 · politics

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियमित नियुक्तियों के लिए बनाई जानेवाली चयन समिति की सूचना के बारे में जानकारी तलब की है। इस मामले की सुनवाई 29 मई को निर्धारित की गई है। मुख्य न्यायाधीश

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियमित नियुक्तियों के लिए बनाई जानेवाली चयन समिति की सूचना के बारे में जानकारी तलब की है। इस मामले की सुनवाई 29 मई को निर्धारित की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीशों जायमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सोमवार को दिल्ली सरकार के लिए उपस्थित वकील को सक्षम प्राधिकरण से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय को बताया गया कि चयन समिति के गठन का प्रस्ताव 4 मई को प्रस्तुत किया गया था। याचिकाकर्ता के लिए उपस्थित अधिवक्ता प्रणव सचदेव ने कहा कि पिछले एक वर्ष से निर्णयात्मक कार्य नहीं किए जा रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले दिल्ली सरकार से एक याचिका पर प्रतिक्रिया मांगी थी, जिसमें दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियमित नियुक्तियों के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

पीठ एक एनजीओ एनर्जी वाचडाग द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसने पिछले वर्ष अगस्त में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख किया। याचिका में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दिए गए आश्वासन के बावजूद, बिजली अधिनियम, 2003 की स्पष्ट वैधानिक धाराओं और अप्रैल, 2018 के निर्णय के अनुसार आयोग के सदस्य के रूप में एक न्यायिक सदस्य/कानून के व्यक्ति को शामिल करने की अनिवार्यता के बावजूद दिल्ली सरकार ने डीईआरसी में नियमित नियुक्तियों के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

खबरें और भी डीईआरसी की वर्तमान संरचना पूरी तरह से कानून के विपरीत है, क्योंकि इसमें केवल दो प्रोटेम सदस्य हैं और ना तो अध्यक्ष है और ना ही कानून का कोई व्यक्ति सदस्य के रूप में है। इसमें कहा गया है कि न्यायिक सदस्य/कानून के व्यक्ति की अनुपस्थिति ने डीईआरसी को अपने निर्णयात्मक कार्यों को पूरा करने में पूरी तरह से असमर्थ बना दिया है।

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