शिक्षा मंत्रालय का 14-18 साल के बच्चों के लिए बड़ा फैसला, पढ़ाई छोड़ चुके दो करोड़ छात्रों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सामाजिक, आर्थिक सहित दूसरे कारणों से स्कूली शिक्षा को बीच में छोड़ चुके देश के 14 से 18 साल की उम्र के करीब दो करोड़ बच्चों को फिर से पढ़ाने और स्किलिंग की तैयारी है। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआइओएस) के साथ मिलकर
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सामाजिक, आर्थिक सहित दूसरे कारणों से स्कूली शिक्षा को बीच में छोड़ चुके देश के 14 से 18 साल की उम्र के करीब दो करोड़ बच्चों को फिर से पढ़ाने और स्किलिंग की तैयारी है। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआइओएस) के साथ मिलकर इसे लेकर एक देशव्यापी योजना तैयार बनाई है। जिसमें पढ़ाई बीच में छोड़ चुके बच्चों की जिला स्तर पर पहचान होगी।
बाद में उन्हें ब्लॉक स्तर पर एनआईओएस की मदद से पढ़ाया और सिखाया जाएगा। इनमें अधिकांश बच्चे ऐसे हैं, जो दसवीं या बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनमें से अधिकांश छोटे-मोटे काम में लगे हुए हैं। शिक्षा मंत्रालय की पहल शिक्षा मंत्रालय ने यह पहल राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से हाल में जारी की गई पीरियाडिक लेवर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) रिपोर्ट के बाद शुरू की है, जिसमें बताया गया था कि देश में 14 से 18 साल की उम्र के करीब दो करोड़ बच्चे ऐसे है, जिन्होंने स्कूली शिक्षा को बीच में छोड़ दी है।
साथ ही इनमें कुछ लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे-मोटे काम में लगे हुए है। शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले दिनों इसे लेकर एनआइओएस के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की थी। जिसमें इन्हें पढ़ाने व स्किलिंग करने की पूरी योजना को बनाई है। इस प्लान के तहत जून महीने में स्कूली शिक्षा को बीच में छोड़ने वाले बच्चों को पहचान होगी, जबकि जुलाई में इन बच्चों को एनआइओएस के जरिए ब्लाक स्तर पर ही दाखिला दिलाया जाएगा।
इन बच्चों को पढ़ाने व स्किलिंग के लिए कंपनियों से भी ऐसा ब्यौरा मुहैया कराने को कहा गया है। खबरें और भी
