Lucknow, India

ECI: मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावी जोखिम प्रबंधन कार्यशाला का उद्घाटन किया, 12 देशों के प्रतिनिधि शामिल

Published 25 May 2026 · politics

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आज 12 देशों के प्रतिनिधियों के लिए पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह कार्यशाला जोखिम प्रबंधन और चुनावी सुदृढ़ता विषय पर इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं में संस्थागत तैयारी और

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आज 12 देशों के प्रतिनिधियों के लिए पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह कार्यशाला जोखिम प्रबंधन और चुनावी सुदृढ़ता विषय पर इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं में संस्थागत तैयारी और लचीलेपन को मजबूत करना है। 25 से 29 मई तक चलेगी कार्यशाला यह कार्यशाला 25 से 29 मई तक चलेगी। इसका आयोजन भारत निर्वाचन आयोग ने इंटरनेशनल आइडिया के सहयोग से किया है।

यह भारत के अध्यक्षीय कार्यक्रम 2026 के तहत हो रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद थे। कार्यशाला का लक्ष्य चुनावी प्रबंधन निकायों (ईएमबी) को संरचित चुनावी जोखिम प्रबंधन ढांचे विकसित करने में सहायता करना है। इसमें नीतियां और परिचालन प्रणालियां भी शामिल हैं। प्रतिभागियों में 12 देशों के चुनाव आयुक्त और ईएमबी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसमें चुनावी प्रबंधक, जोखिम प्रबंधन और प्रौद्योगिकी प्रोफेशनल भी भाग ले रहे हैं।

संकट प्रबंधन और चुनावी अखंडता पहलों से जुड़े अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण विषयगत क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें चुनावी जोखिम प्रबंधन की नींव, चुनावी अखंडता और सुरक्षा उपाय शामिल हैं। जोखिम की पहचान और मूल्यांकन, लचीलापन और संकट प्रबंधन भी इसमें शामिल हैं। अंतर-एजेंसी समन्वय और रणनीतिक योजना पर भी चर्चा की जा रही है। कार्यशाला में इलेक्टोरल रिस्क मैनेजमेंट टूल (ईआरएमटूल) पर व्यावहारिक प्रदर्शन भी शामिल हैं। इसमें जोखिम कारक पुस्तकालयों का अनुकूलन और जोखिम व कार्रवाई रजिस्टर (आरएआर) शामिल हैं।

क्षेत्र का दौरा और संस्थागत बातचीत कार्यक्रम में क्षेत्र के दौरे और संस्थागत बातचीत भी शामिल हैं। इनका उद्देश्य जमीनी स्तर पर चुनावी योजना को समझना है। यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को वास्तविक दुनिया के अनुभवों से सीखने का मौका देगा। इससे उन्हें अपने देशों में बेहतर चुनावी प्रक्रियाएं लागू करने में मदद मिलेगी।

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