Lord Jagannath: भगवान के महास्नान से रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत, अनावसार में क्यों नहीं होते देवताओं के दर्शन?
भगवान जगन्नाथ को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। मान्यता है कि महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ
भगवान जगन्नाथ को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। मान्यता है कि महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ समेत तीनों देवी-देवता बीमार पड़ जाएंगे। इस कारण 15 दिनों तक भगवान के सार्वजनिक दर्शन बंद रहेंगे। इस 15 दिन की अवधि को अनावसार कहा जाता है। इन 15 दिनों के दौरान भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बालभद्र के पट्टचित्रों की पूजा की जाती है और श्रद्धालु इन पट्टचित्रों के ही दर्शन करते हैं। परंपरा के अनुसार, इस अनावसार काल में भगवान का इलाज होता है और राजवैद्य भगवान का इलाज करते हैं। ऐसी मान्यता है कि बीमारी के दौरान भगवान को परेशानी न हो इस वजह से मंदिर में घंटियां भी नहीं बजाई जातीं और न ही मंदिर में कोई मरम्मत कार्य होता है।भगवान पट्टचित्रों के निर्माण में पूरी तरह प्राकृतिक स्रोतों से तैयार रंगों का उपयोग किया जाता है। सफेद रंग समुद्र से प्राप्त शंख के पाउडर से बनाया जाता है।
शंख को बारीक पीसकर, पानी में भिगोकर और गर्म करने के बाद दूधिया सफेद रंग तैयार किया जाता है। काला रंग दीपक की कालिख, लकड़ी के कोयले की कालिख अथवा नारियल के रेशों को जलाने से प्राप्त कालिख से बनाया जाता है। लाल रंग प्राकृतिक खनिज हिंगुल (सिनाबार) से तैयार किया जाता है।पीला रंग हरिताल अथवा शुद्ध हल्दी से प्राप्त किया जाता है, जबकि हरा रंग विभिन्न औषधीय एवं हरी पत्तियों के रस से तैयार होता है। रंगों को टिकाऊ बनाने के लिए कैथा (वुड एप्पल) के प्राकृतिक गोंद का उपयोग बाइंडिंग एजेंट के रूप में किया जाता है, जिससे रंग कपड़े के कैनवास पर मजबूती से चिपके रहते हैं।कपड़े के कैनवास (पट्टी) की तैयारी की जाती है। पेंटिंग शुरू करने से पहले, कपड़े को इमली के बीज के पेस्ट और चॉक पाउडर के मिश्रण से कोट किया जाता है, ताकि वह चिकना और मजबूत बन सके और उस पर बारीक पट्टचित्र कलाकारी की जा सके।चित्रकार सेवायत श्रीधर महाराणा ने बताया कि अनसर पट्टी भगवान जगन्नाथ की हमारी पारंपरिक सेवा का एक हिस्सा है।
यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। भगवान जगन्नाथ की काष्ठ प्रतिमाओं की पूजा शुरू होने के बाद से ही स्नान यात्रा के उपरांत होने वाले वार्षिक अनसर काल में इसका विशेष महत्व रहा है।उन्होंने बताया कि इस अवधि में भगवान 15 दिनों तक श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं देते। इसे अत्यंत पवित्र और गोपनीय सेवा माना जाता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ को श्री अनंत नारायण, भगवान बलभद्र को श्री अनंत वासुदेव और देवी सुभद्रा को भुवनेश्वरी के रूप में दर्शाया जाता है।उन्होंने कहा कि श्री अनंत नारायण को भगवान विष्णु के चार भुजाओं वाले स्वरूप में काले रंग से चित्रित किया जाता है। इसी तरह, देवी-देवताओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक रंग तय नियमों के अनुसार होते हैं। इन पंद्रह दिनों के दौरान, गर्भगृह बंद रहता है और मंदिर के बंद दरवाजों के सामने इन पवित्र पट्टचित्र चित्रों का उपयोग करके पूजा की जाती है।स्नान पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट और पद्मश्री पुरस्कार विजेता सुदर्शन पटनायक ने रविवार को ओडिशा के पुरी बीच पर रेत की एक शानदार कलाकृति बनाई।
