इस्तीफे के तीसरे दिन चंपत राय दिल्ली गए:संघ राम मंदिर चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट बना रहा; नए सिरे से बनेगा ट्रस्ट
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद महासचिव चंपत राय रविवार शाम अयोध्या से दिल्ली रवाना हो गए। वह दोपहर तीन बजे
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद महासचिव चंपत राय रविवार शाम अयोध्या से दिल्ली रवाना हो गए। वह दोपहर तीन बजे तक राम मंदिर में ही थे। सूत्रों का कहना है कि चंपत राय अब 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में शामिल हो सकते हैं। उसी दिन उनके इस्तीफे पर विचार होना है। चंपत राय ने शुक्रवार को इस्तीफा दिया था। इधर, राष्ट्रीय स्वयं संघ (RSS) भी चढ़ावा चोरी के मामले पर नजर बनाए है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के निर्देश पर पूर्वी यूपी के क्ष्रेत्र प्रचारक अनिल कुमार अयोध्या पहुंचे हैं। वे साधु-संतों, महंतों और मंदिर से जुड़े लोगों से मिलकर लगातार बात कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। PM मोदी के विदेश से लौटने के बाद ट्रस्ट के दोबारा गठन पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इसमें अयोध्या के संतों और समाज के कई वर्गों को जिम्मेदारी देने पर मंथन चल रहा है। मोहन भागवत को रिपोर्ट सौंपेंगे क्षेत्र प्रचारक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार अयोध्या में शनिवार (27 जून) से डेरा डाले हैं। उन्होंने शनिवार देर शाम राम मंदिर में 2 घंटे गुजारे। रामलला का दर्शन किया, साथ ही मंदिर के प्रमुख सेवादारों से बात भी की। इसके अलावा, अयोध्या के प्रमुख महंतों से चढ़ावा चोरी को लेकर बात की। अयोध्या में लक्ष्मण किलाधीश महंत मैथिलीरमण शरण, हनुमत निवास के महंत डॉ.
मिथिलेशनंदिनी शरण, मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, सरयू आरती के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास से मिलकर उनकी राय ली। वे अभी अयोध्या में सोमवार को भी संतों-महंतों से बात करेंगे। इसके बाद अपनी रिपोर्ट बनाकर संघ प्रमुख मोहन भागवत को सौंपेंगे। इससे पहले RSS की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भैयाजी जोशी (सुरेश जोशी) अयोध्या में एक रात रुके थे। यहां मंदिर से जुड़े संतों-महंतों से बात की थी। वह अपनी रिपोर्ट RSS प्रमुख को दे चुके हैं। राम मंदिर के RMO अर्जुन देव भी SIT की रडार पर 1600 कैमरों की निगरानी का जिम्मा अर्जुन देव पर था राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में अब नया नाम सामने आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने राम जन्मभूमि में तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव की भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया है। चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम में लगे CCTV कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी अर्जुन देव के पास थी। इसके अलावा, राम जन्मभूमि में लगे करीब 1600 कैमरों की निगरानी भी अर्जुन देव के पास थी। अब निगरानी तंत्र में उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में उनकी 17 साल से अयोध्या में लगातार तैनाती और ट्रस्ट के कामों में सक्रिय दखल का भी उल्लेख किया गया है। RMO अर्जुन रामलला जब टेंट में थे, तब भी CCTV का काम देखते थे। SIT के सामने अकड़ में पेश हुए अर्जुन देव काउंटिंग रूम में रामलला के चढ़ावे की गिनती CCTV कैमरों की मॉनिटरिंग में होती थी।
जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावा चोरी कैसे हुई। निगरानी क्यों नहीं रखी गई। इसी आधार पर SIT ने अपनी शुरुआती 3 दिनों की जांच के दौरान अर्जुन देव से भी पूछताछ की थी। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर अर्जुन देव SIT के सामने पहुंचे, ऐंठ कर कुर्सी पर बैठे। उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय कहा कि वह अपने वकील के माध्यम से जवाब देंगे। बताया जा रहा है कि इस पर जांच अधिकारियों ने उन्हें फटकार लगाते हुए पद की गरिमा और मर्यादा का पालन करने की नसीहत दी। ट्रांसफर कई बार हुआ, लेकिन हर बार रुकवा लिया अर्जुन देव साल 2009 से लगातार अयोध्या में तैनात हैं। इस दौरान कई बार उनके ट्रांसफर के आदेश जारी हुए, लेकिन हर बार उनका ट्रांसफर रुक गया। हाल ही में लखनऊ के लिए जारी ट्रांसफर आदेश भी निरस्त कर दिया गया था। अर्जुन देव के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से करीबी संबंध रहे हैं। इन्हीं संबंधों के चलते उनके तबादले बार-बार रुकते रहे। SIT ये भी पता लगा रही है कि आखिरी ट्रांसफर कौन रुकवा रहा था। बार-बार ट्रांसफर क्यों रोका गया। एक ही जिले में इतनी लंबी तैनाती का मतलब क्या था। ट्रस्ट के कामों में सक्रिय भूमिका पर भी सवाल उठे अर्जुन देव की निगरानी CCTV निगरानी के अलावा मंदिर परिसर के कंट्रोल रूम से पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच वायरलेस संचार को बनाए रखना, ड्यूटी पर तैनात जवानों से संपर्क रखना, वीआईपी मूवमेंट और आपात स्थिति में तत्काल सूचना का आदान-प्रदान कराना भी था।