क्या फिर से लौटेगा हिम युग?: कनाडा के प्राचीन ज्वालामुखीय विस्फोट से बढ़ रही आशंका, जानें वैज्ञानिकों का दावा
नए अध्ययन में दावा किया गया है कि विशाल ज्वालामुखीय घटनाओं ने वातावरण से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड हटाकर पृथ्वी को बार-बार जमने और
नए अध्ययन में दावा किया गया है कि विशाल ज्वालामुखीय घटनाओं ने वातावरण से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड हटाकर पृथ्वी को बार-बार जमने और पिघलने के चक्र में धकेला। शोधकर्ताओं के अनुसार यही प्रक्रिया इस असाधारण रूप से लंबे हिमयुग की वजह बन सकती है।
अर्थस्नैप में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार यह अध्ययन अमेरिका की हार्वर्ड जॉन ए. पॉलसन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड एप्लाइड साइंसेज की शोधार्थी शार्लोट मिन्स्की के नेतृत्व में किया गया है।शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस) में प्रकाशित हुआ है। क्रायोजेनियन काल के दौरान पृथ्वी पर ऐसे दौर आए जब माना जाता है कि ग्रह का अधिकांश हिस्सा बर्फ से ढक गया था।
इसी कारण वैज्ञानिकों ने इसे स्नोबॉल अर्थ नाम दिया।सामान्य जलवायु मॉडल बताते हैं कि ज्वालामुखी से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड धीरे-धीरे वातावरण में जमा होती है, जिससे ग्रह गर्म होने लगता है और हिमनद पीछे हटने लगते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः करीब 40 लाख वर्ष लगते हैं।
इसी आधार पर वैज्ञानिक मैरिनोअन ग्लेशिएशन नामक एक अन्य हिमयुग को समझ पाते हैं, जो लगभग 40 लाख वर्ष तक चला था।
