'जिंदा लाशों' का कारखाना... मुजफ्फरनगर के बंधुआ मजदूरों की दर्दनाक कहानी से क्या सबक मिला?
मुजफ्फरनगर के एक दोने-पत्तल बनाने वाली फैक्ट्री से मुक्त कराए गए मजदूरों की कहानी केवल एक आपराधिक घटना नहीं है. ये उस भारत का आईना
मुजफ्फरनगर के एक दोने-पत्तल बनाने वाली फैक्ट्री से मुक्त कराए गए मजदूरों की कहानी केवल एक आपराधिक घटना नहीं है. ये उस भारत का आईना है, जो 21वीं सदी में चंद्रमा पर पहुंचने का दावा करता है, डिजिटल अर्थव्यवस्था की बात करता है, 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देखता है, लेकिन उसी देश में कुछ लोग महीनों तक कैद रखे जाते हैं, पीटे जाते हैं, भूखा रखा जाता है और उनसे जानवरों की तरह काम कराया जाता है. शुरुआती पुलिस जांच और पीड़ितों के बयानों के अनुसार मजदूरों को नौकरी का झांसा देकर लाया गया, उनके मोबाइल और पहचान पत्र छीन लिए गए, उन्हें लंबे समय तक बंधक बनाकर रखा गया और विरोध करने पर बेरहमी से पीटा गया. मामले में 2 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जांच अभी जारी है और आरोप न्यायालय में सिद्ध होना बाकी है.
