हिंद महासागर में भारत की बढ़ी ताकत: सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस पर दिखा सेना का दम, दुनिया को क्या संदेश?
सेशेल्स अपना 50वां राष्ट्रीय दिवस मना रहा है। इस भव्य समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि (गेस्ट ऑफ ऑनर) के रूप में
सेशेल्स अपना 50वां राष्ट्रीय दिवस मना रहा है। इस भव्य समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि (गेस्ट ऑफ ऑनर) के रूप में शामिल हुए हैं। पीएम मोदी 27 जून से सेशेल्स के तीन दिवसीय दौरे पर हैं, जहां वे राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। भारत की यह उच्च स्तरीय भागीदारी दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और सैन्य तालमेल को साफ दर्शाती है।भारतीय सेना की असम रेजिमेंट के 32 जवानों का एक दस्ता कैप्टन आर्यन एच देवलेकर के नेतृत्व में परेड में शामिल हुआ।भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन स्टील्थ फ्रिगेट 'आईएनएस तरकश' और देश में ही बना सर्वे वेसल लार्ज 'आईएनएस इक्षक' विक्टोरिया पोर्ट पहुंचे हैं।भारतीय नौसेना के मार्चिंग दस्ते और मिलिट्री बैंड ने अपनी धुनों से समारोह में समां बांध दिया।आईएनएस तरकश और आईएनएस इक्षक दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत यहां पहुंचे हैं।भारतीय सशस्त्र बल इससे पहले 2023 में फ्रांस के बैस्टिल डे परेड, 2021 में बांग्लादेश के विजय दिवस और 2015 व 2020 में रूस के विजय दिवस परेड में भी शामिल हो चुके हैं।भारत और सेशेल्स के बीच संबंध सदियों पुराने और सांस्कृतिक हैं।
लेकिन अब यह रिश्ता रक्षा, विकास, संस्कृति और व्यापार के क्षेत्रों में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी में बदल चुका है। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों जहाजों की यह यात्रा दोनों देशों के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी और गहरी दोस्ती को रेखांकित करती है। सेना के मुताबिक, मित्र देशों के राष्ट्रीय समारोहों में भारतीय सेना की भागीदारी आपसी विश्वास, सैन्य सौहार्द और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को और मजबूत करता है।सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी, भारतीय सेना की परेड और आईएनएस तरकश व आईएनएस इक्षक जैसे युद्धपोतों की तैनाती दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत अब हिंद महासागर में केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा का भरोसेमंद साझेदार बनकर उभर रहा है।
यह कदम मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग, मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्गों तथा क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। साथ
ही, इसे हिंद महासागर में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की मजबूत रणनीतिक मौजूदगी और प्रभाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
