Arunachal Flood:बाढ़ के बीच 36 घंटे में बहाल हुआ अहम सड़क संपर्क, बीआरओ ने राहत कार्यों को दी रफ्तार
जानकारी के मुताबिक, लगातार बारिश के कारण कीई पन्योर और पापुम पारे जिलों के बीच 45 किलोमीटर लंबे किमिन-पोटिन मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन
जानकारी के मुताबिक, लगातार बारिश के कारण कीई पन्योर और पापुम पारे जिलों के बीच 45 किलोमीटर लंबे किमिन-पोटिन मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन, सड़क धंसने और मलबा जमा होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। इससे पोटिन, याजाली, याचुली, जोराम और जीरो जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का संपर्क टूट गया।स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-13 भी बंद हो गया।
इससे राहत सामग्री की आपूर्ति, आपदा राहत दलों की आवाजाही और नाहरलागुन स्थित टोमो रिबा आयुर्विज्ञान एवं स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान (टीआरआईएचएमएस) जैसे प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना मुश्किल हो गया था।नागरिक प्रशासन के अनुरोध पर बीआरओ की 756 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए करीब 80 कर्मियों और भारी मशीनरी को राहत कार्य में लगाया। लगातार बारिश, अस्थिर पहाड़ियों और बार-बार हो रहे भूस्खलन के बावजूद टीमों ने दिन-रात अभियान चलाकर मलबा हटाया, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की और सड़क को यातायात के लिए फिर से खोल दिया।बीआरओ ने रविवार मध्यरात्रि तक सड़क पर वाहनों की आवाजाही बहाल कर दी।
इसके साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों को गति मिली और प्रभावित क्षेत्रों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी फिर से शुरू हो गई।बीआरओ इस सड़क को दो लेन में उन्नत करने की परियोजना पर भी काम कर रहा है। इसके पूरा होने के बाद इस रणनीतिक मार्ग की क्षमता, मजबूती और आपदा के दौरान इसकी उपयोगिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के लिए बीआरओ की भूमिका एक बार फिर सामने आई है।
हालिया अभियान ने न केवल प्रभावित इलाकों की जीवनरेखा को बहाल किया, बल्कि राहत एवं बचाव कार्यों को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
