जस्टिस माहेश्वरी की विदाई: नरसिम्हा बने कॉलेजियम सदस्य, अब कौन संभालेगा सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति?
जस्टिस माहेश्वरी की विदाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया स्वरूप सामने आ गया है। इस पांच सदस्यीय कॉलेजियम में अब देश के
जस्टिस माहेश्वरी की विदाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया स्वरूप सामने आ गया है। इस पांच सदस्यीय कॉलेजियम में अब देश के दिग्गज न्यायाधीश शामिल हैं। इस नई टीम की कमान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के हाथों में है। उनके साथ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी वी नागरत्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश और अब जस्टिस पी एस नरसिम्हा इसमें शामिल हो चुके हैं। यही वो पांच सबसे वरिष्ठ जज हैं, जिनके कंधों पर अब भारतीय न्यायपालिका के भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी होगी।भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति की यह व्यवस्था बेहद अनूठी है।
कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद हुई थी। इस व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पांच शीर्ष जज मिलकर काम करते हैं। यही समिति सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति करती है। जजों के तबादले और उनकी पदोन्नति का फैसला भी यही कॉलेजियम लेता है।इस व्यवस्था में केंद्र सरकार की भी अपनी भूमिका होती है। सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकती है। हालांकि, नियम के मुताबिक यदि कॉलेजियम दोबारा वही नाम भेज दे, तो सरकार को उसे स्वीकार करना होता है।
लेकिन कई बार सरकार फाइलों को रोक लेती है या उन पर जवाब नहीं देती है।जस्टिस पी एस नरसिम्हा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनका जन्म तीन मई 1963 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद के निजाम कॉलेज से अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन में ट्रिपल मेजर की डिग्री ली। इसके बाद साल 1988 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसी साल उन्होंने वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने शुरुआत में हैदराबाद की निचली अदालतों, ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट में वकालत की।
इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट आ गए।उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक संवैधानिक पीठों के सामने जजों की मदद की। वह जस्टिस चिन्नप्पा रेड्डी आयोग के वकील भी रहे। साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया। साल 2014 में वह देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) बने। इस दौरान उन्होंने एनजेएसी जैसे बड़े मामलों में अदालत की सहायता की। वह कनाडाई सुप्रीम कोर्ट गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे। 31 अगस्त 2021 को वह सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे।
