CBSE पर सवाल उठाने वाले सार्थक ने पोर्टल बनाया:इसमें ₹1.66 करोड़ सरकारी खरीद का डेटा, आम जनता भी रिकॉर्ड को देख सकेगी
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर सवाल उठाने वाले 12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत (18) ने एक सार्वजनिक पोर्टल लॉन्च किया है। इसमें भारत
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर सवाल उठाने वाले 12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत (18) ने एक सार्वजनिक पोर्टल लॉन्च किया है। इसमें भारत सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल के करीब 1.66 करोड़ सरकारी खरीद का रिकॉर्ड है। सार्थक ने अपने X पर बताया- पिछले दो हफ्तों की कड़ी मेहनत के बाद सरकार के CPP पोर्टल से लगभग 1.66 करोड़ रिकॉर्ड निकाले हैं। अब ये सरकारी रिकॉर्ड आम नागरिकों, पत्रकारों और रिसर्चर्स के लिए पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। यह पारदर्शिता की दिशा में उठाए बड़े कदम की शुरुआत है। सार्थक का कहना है कि लोगों को पता चले कि सरकारी खजाने का पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है।
CPP पोर्टल से लिए गए इस आर्काइव्ड डेटा का मकसद पब्लिक स्पेंडिंग यानी सरकारी खर्च के रिकॉर्ड्स को ढूंढना और उनका विश्लेषण आम आदमी के लिए आसान बनाना है। डेटा sarthaksiddhant.com पर अपलोड किया सार्थक ने यह पूरा डेटा उन्होंने अपने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर अपलोड किया है, जहां से कोई भी व्यक्ति इसे देख और डाउनलोड कर सकता है। उन्होंने कहा कि मेरा मकसद है कि लोग इस डेटाबेस को डाउनलोड कर अपने स्तर पर सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच-पड़ताल करें। सार्थक का यह नया पोर्टल अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। इसमें भारत सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल से जुटाए गए सरकारी खरीद से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।
इसका मकसद सरकारी खर्च से जुड़े रिकॉर्ड्स को आम लोगों के लिए आसानी से खोजने, समझने और उनका विश्लेषण करने लायक बनाना है। राहुल गांधी ने सिद्धांत से मुलाकात की थी 18 सार्थक सिद्धांत ने इस साल 12वीं की परीक्षा दी थी। एग्जाम में नंबर कम आने पर उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर सवाल उठाया था। इसके बाद उन्होंने OSM करने वाली कंपनी को मिले टेंडर की प्रोसेस की खुद खोजबीन की और उसमें खामियां निकालीं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 2 जून को सिद्धांत से मुलाकात का 8.15 मिनट का वीडियो अपने X अकाउंट पर 7 जून को शेयर किया था। राहुल ने कहा कि सार्थक ने CBSE और COEMPT की मिलीभगत को देश के सामने रख दिया है।
मोदी जी चाहते हैं हमारे युवा रील्स बनाते रहें, पकौड़े तलते रहें। न तो सवाल पूछे और न ही आंखें खोलें। लेकिन इन बच्चों ने सवाल भी पूछे और जवाब भी ढूंढ निकाले।। ये फर्म तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों मे डिजिटल इवैल्यूएशन का काम करती है। 2019 में इसका नाम ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड था। तब इस पर तेलंगाना में 12वीं के बोर्ड एग्जाम में डेटा प्रोसेसिंग में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उस साल राज्य में 9.74 लाख में से 3 लाख से ज्यादा बच्चे फेल हो गए थे।