रांची के सार्थक सिद्धांत ने बनाया पोर्टल:सार्वजनिक किया 1.66 करोड़ सरकारी खरीद का डेटा; CBSE के मार्किंग सिस्टम पर उठाए थे सवाल
रांची के 17 साल के टेक रिसर्चर और CBSE के 12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत ने भारत सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल के
रांची के 17 साल के टेक रिसर्चर और CBSE के 12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत ने भारत सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल के करीब 1.66 करोड़ सरकारी खरीद रिकॉर्ड वाला एक सार्वजनिक पोर्टल लॉन्च किया है। सार्थक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पारदर्शिता हर किसी की पहुंच में होनी चाहिए और आज से यह संभव है। दरअसल, सिद्धांत ने 12वीं क्लास की परीक्षा दी थी। नंबर कम आने पर उन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए अपनी स्कैन की गई आंसरशीट मंगाई थीं। 12वीं क्लास के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और OSM का काम करने वाली कंपनी COEMPT से जुड़ी टेंडर प्रोसेस में गड़बड़ी का खुलासा किया था। उनका मामला संसद तक पहुंचा, जिसके बाद उन्हें संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने बुलाया गया।
वहां उन्होंने CBSE की मूल्यांकन प्रणाली और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अपने निष्कर्ष समिति के सामने रखे थे। रिकॉर्ड्स को कोई भी देख और डाउनलोड कर सकता उन्होंने बताया कि पिछले दो हफ्तों में इकट्ठा किए गए रिकॉड आम लोगों, पत्रकारों और रिसर्चर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है, ताकि कोई भी इन रिकॉर्ड्स को आसानी से देख और उनका विश्लेषण कर सके। खास बात यह है कि यह पूरा डेटा उन्होंने अपने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर अपलोड किया है, जहां से कोई भी व्यक्ति इसे देख और डाउनलोड कर सकता है। उनका कहना है कि यह सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सिर्फ शुरुआत है। पोर्टल में भारत सरकार के रिकॉर्ड शामिल हैं सार्थक का यह नया पोर्टल अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है।
इसमें भारत सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल से जुटाए गए सरकारी खरीद से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। इसका मकसद सरकारी खर्च से जुड़े रिकॉर्ड्स को आम लोगों के लिए आसानी से खोजने, समझने और उनका विश्लेषण करने लायक बनाना है। राहुल गांधी ने सिद्धांत से मुलाकात की थी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 2 जून को सिद्धांत से मुलाकात का 8.15 मिनट का वीडियो अपने X अकाउंट पर 7 जून को शेयर किया था। राहुल ने कहा कि सार्थक ने CBSE और COEMPT की मिलीभगत को देश के सामने रख दिया है। मोदी जी चाहते हैं हमारे युवा रील्स बनाते रहें, पकौड़े तलते रहें। न तो सवाल पूछे और न ही आंखें खोलें।
लेकिन इन बच्चों ने सवाल भी पूछे और जवाब भी ढूंढ निकाले।। ये फर्म तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों मे डिजिटल इवैल्यूएशन का काम करती है। 2019 में इसका नाम ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड था। तब इस पर तेलंगाना में 12वीं के बोर्ड एग्जाम में डेटा प्रोसेसिंग में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उस साल राज्य में 9.74 लाख में से 3 लाख से ज्यादा बच्चे फेल हो गए थे।