राम मंदिर चढ़ावा गबन: सरकार-संघ के चौतरफा दबाव में हुआ इस्तीफा, बजरंग लाल बागड़ा ले सकते हैं चंपत की जगह
विहिप सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे में अनियमितता की सूचना आने के बाद से ही चंपत और अनिल के स्वेच्छा से पद छोड़ने का इंतजार किया
विहिप सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे में अनियमितता की सूचना आने के बाद से ही चंपत और अनिल के स्वेच्छा से पद छोड़ने का इंतजार किया जा रहा था। ऐसा नहीं होने पर इन्हें दोनों ही ओर से पद छोड़ने का सीधा संदेश दिया गया। हरिद्वार में बीते सप्ताह हुई विहिप की मार्गदर्शक मंडल की बैठक में भी आमराय थी कि प्रतिष्ठा और संभावित नुकसान के मद्देनजर इन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
इसके बाद चंपत को बैठक में संतों और पदाधिकारियों की इच्छा से भी अवगत कराया गया। सूत्रों ने कहा कि संघ गड़बड़ी सामने आने के तत्काल बाद ही चंपत राय के इस्तीफे के पक्ष में था। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, सवाल लोगों की आस्था को पहुंची चोट का है।चंपत राय शुक्रवार रात तक पद नहीं छोड़ने पर अड़े थे। इसके बाद शनिवार को उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय और संघ की ओर से तत्काल पद छोड़ने का सख्त संदेश दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, उन्हें यहां तक कहा गया कि पद नहीं छोड़ने की स्थिति में ट्रस्ट की ओर से उन्हें हटाने की सूचना सार्वजनिक की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि चंपत अब इसी महीने के अंत तक आने वाली एसआईटी की रिपोर्ट के बाद मीडिया के समक्ष पक्ष रखेंगे।सूत्रों ने बताया, ट्रस्ट की बैठक अगले महीने दूसरे सप्ताह में हो सकती है।
बैठक से पहले चढ़ावा चोरी मामले में हुए नुकसान की भरपाई का रोडमैप तैयार किया जाएगा। चढ़ावे को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ट्रस्ट को विश्वसनीय बनाने से जुड़े कदम उठाए जाएंगे।
