इस्तीफा देकर आरएसएस में शामिल हो जाओ: आईपीएस अधिकारी पर क्यों भड़के राज ठाकरे? कांग्रेस ने भी जताई नाराजगी
फेसबुक पर जारी एक पोस्ट में राज ठाकरे ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी की निष्ठा केवल अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति होनी चाहिए।
फेसबुक पर जारी एक पोस्ट में राज ठाकरे ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी की निष्ठा केवल अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति होनी चाहिए। लेकिन नांगरे पाटिल सार्वजनिक रूप से आरएसएस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने को उतावले दिखाई दे रहे हैं। राज ठाकरे की यह टिप्पणी उस वीडियो के वायरल होने के बाद आई है, जिसमें विश्वास नांगरे पाटिल हिंदू सकल समाज द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन में संबोधित करते नजर आ रहे हैं। गुरुवार को वायरल हुए इस वीडियो के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। नांगरे पाटिल को इसी सप्ताह नागपुर का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। राज ठाकरे ने अपने पोस्ट में कहा कि जो भी व्यक्ति यह समझने की कोशिश करेगा कि ऐसे सम्मेलनों का आयोजन कौन करता है और इनके वास्तविक उद्देश्य क्या हैं, वह आसानी से समझ जाएगा कि इनके पीछे कौन है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या गैर-राजनीतिक संगठन को कार्यक्रम आयोजित करने और अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या किसी कार्यरत सरकारी अधिकारी, खासकर एक पुलिस अधिकारी, को ऐसे कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए? राज ठाकरे ने लिखा, 'क्या आप (विश्वास नांगरे पाटिल) यह भूल गए हैं कि आप एक पुलिस अधिकारी हैं और आपके पद पर निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षाओं में से एक है? यदि आपको आरएसएस के प्रति लगाव या सम्मान है तो उसे अपने तक सीमित रखें।' अगर आप इसे सार्वजनिक रूप से व्यक्त करना चाहते हैं, तो पहले नौकरी से इस्तीफा दें और फिर आरएसएस या भाजपा में शामिल हो जाएं।
पिछले कई वर्षों से पसंदीदा अधिकारियों के पुनर्वास की व्यवस्था चल रही है। आपको भी निश्चित रूप से जगह मिल जाएगी।'मनसे प्रमुख ने वर्ष 2012 की एक घटना का भी जिक्र किया, जब रजा अकादमी के खिलाफ मनसे के विरोध मार्च के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल ने पुलिस बल के समर्थन में खड़े होने पर उन्हें बधाई दी थी। राज ठाकरे ने दावा किया कि उस समय की सरकार ने इसे निष्पक्षता का उल्लंघन माना था और संबंधित पुलिसकर्मी को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा सरकार विश्वास नांगरे पाटिल के मामले में भी वही मापदंड अपनाएगी या फिर इस तरह की कथित दोहरी निष्ठा अब सरकार के लिए स्वीकार्य हो गई है।इस बीच, महाराष्ट्र कांग्रेस ने कार्यक्रम में दिए गए नांगरे पाटिल के भाषण की जांच की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि आरएसएस की कथित प्रशंसा करने वाला उनका भाषण उनकी निष्पक्षता और सेवा नियमों के खिलाफ है।
