Kerala: 'FCRA संशोधन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं', केरल BJP अध्यक्ष बोले- कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया
एफसीआरए संशोधनों को लेकर भाजपा का क्या कहना है? ईसाई संगठनों ने किस बात पर चिंता जताई है? आपातकाल की बरसी पर चंद्रशेखर ने क्या
एफसीआरए संशोधनों को लेकर भाजपा का क्या कहना है? ईसाई संगठनों ने किस बात पर चिंता जताई है? आपातकाल की बरसी पर चंद्रशेखर ने क्या कहा? कांग्रेस और राज्य सरकार पर भाजपा ने क्या आरोप लगाए? तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान एफसीआरए संशोधनों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि इस वजह से भाजपा को ईसाई समुदाय के बीच नुकसान उठाना पड़ा। चंद्रशेखर ने यह भी स्पष्ट किया कि एफसीआरए के तहत सिर्फ ईसाई संस्थाएं ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों से जुड़ी संस्थाएं विदेशी फंड प्राप्त करती हैं और कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसका इस्तेमाल किसी विशेष समूह को निशाना बनाने के लिए किया जा सके।राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि संशोधनों का मकसद विदेशी चंदे के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी संगठन को कानून को लेकर वास्तविक चिंता है, तो उसे सरकार से चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार इस मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह स्वयं भी संबंधित संगठनों और गृह मंत्रालय के बीच बातचीत कराने में मदद करेंगे।केरल के कई ईसाई संगठनों ने एफसीआरए संशोधनों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नए प्रावधानों से चर्च और उससे जुड़े संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भाजपा का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य किसी धार्मिक संस्था को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर बोलते हुए राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि आपातकाल को सिर्फ इतिहास के एक अध्याय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की याद दिलाता है। चंद्रशेखर ने कहा कि भारत जब विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब देश के भीतर और बाहर ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करना चाहती हैं।राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह जमात-ए-इस्लामी जैसी ताकतों को केरल की राजनीति में
मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है, जो एक खतरनाक प्रवृत्ति है। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड की वजह से राज्य में संपत्ति के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए शराब को सस्ता और आसानी से उपलब्ध कराकर जीवन के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है।
